642 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
महोदय समझ सकते हैं कि सदस्यों के लिए यह कितना कठिन है जो इस प्रस्ताव या यकीनन बोलना और इस पर पूरी चर्चा करना चाहते हैं। यों वे जानते ही हैं कि इस सत्र के दौरान कया किसी और विधेयक पर विचार किया जा रहा है।
मैंने कल कहा था कि शुरू में ही जब यह प्रस्ताव लाया गया था, तब अधिकतर सदस्यों का मानना था कि इस विधेयक को इस सत्र में दोबाना न लाया जाए। वस्तुतः जब ऐसे महत्वपूर्ण और बृहत बिल को दोबारा विचारार्थ लाया गया था तब हम चाहते थे कि सदस्यों को समय से पूर्व सूचना दी जाए, परंतु ऐसा नहीं किया गया। मेरे मत की संपूर्ण महत्ता इस बात में है कि जब हमें यह पता है कि इस पर चर्चा होगी और यह केवल आज तक ही चलेगी तो हम यह बात समझ सकते हैं। लेकिन दूसरी तरफ हमें बताया गया कि इस सत्र में अतिरिक्त दिनों की व्यवस्था की जाएगी, यह अलग मामला है। परन्तु जो सदस्य इसके पक्ष या विपक्ष में बोलना चाहते हैं और इस चर्चा में आना और भाग लेना चाहते हैं, वे सूचना के अभाव में आ ही नहीं पाएँगे। हमने कल इस पर शुरूआत की, पर कई माननीय सदस्य इसमें भाग नहीं ले पाए। उदाहरणार्थ श्री के. एम. मुंशी यहाँ आए और प्रस्ताव पर बोलकर चले गए तथा कई सदस्य ऐसे थे जो इस महत्वपूर्ण बिल पर एक या दूसरे तरीके से बोलना चाहते थे। यदि सदन आपके माध्यम से जान सकें-ऐसा कहना और करना आपके लिए संभव भी है-कि कुछ अतिरिक्त दिनों की व्यवस्था कराई जा रही है, तो इससे वास्तव में, सहायता मिलेगी। अन्यथा हम नहीं जानते हैं कि इस महत्वपूर्ण बिल के संबंध में हम क्या कर पा रहे हैं।
माननीय अध्यक्षः मैं, जानता चाहता हूँ कि क्या मानसिक कानून मंत्री इस स्थिति में हैं कि हमें मार्गदर्शन दे सकें।
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (कानून मंत्री)ः मैं केवल इतना कह सकता हूँ कि इस बिल पर चर्चा की जाएगी। अगला चरण क्या होगा इस बात को बताने में असमर्थ हूँ, क्योंकि सरकार कार्रवाई की व्यवस्था का मुद्दा सरकार की एक समिति जिसे ‘‘प्राथमिकता समिति’’ कहते हैं के अंतर्गत है। समिति ने इस बिल के दिनों का निर्धारण किया था। समिति दोपहर बाद पुनः बैठक करेगी और इस पर अपना निर्णय लेगी। इसके अलावा, इस विषय पर मैं कुछ भी कहने में असमर्थ हूँ।
पंडित लक्ष्मी कांत मैत्रेयः इस परिप्रेक्ष्य में मैं, अध्यक्ष महोदय के समक्ष सम्मानपूर्वक कहना चाहता हूँ कि अध्यक्ष महोदय के पास पर्याप्त शक्तियाँ ये देखने के लिए निहित हैं कि इस बिल के संबंध में यह प्रक्रिया ग्रहण नहीं की जाए। जब तक माननीय सदस्यों को पर्याप्त सूचना न दी गई हो, और जब यह प्रस्ताव आया तब आप निश्चित रूप से यह कहने के लिए सक्षम थेः ‘‘मैं इस प्रस्ताव को लाने की अनुमति नहीं दूँगा, क्योंकि इससे हम महत्वपूर्ण चर्चा में भाग लेने वाले माननीय सदस्यों के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।’’