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लेकिन इसी सत्र के दौरान समय-समय पर जिस तरीके से इस विधेयक को उठाया गया है, उस संबंध में मेरी शुरू से ही शिकायत रही है, जिसकी वजह से माननीय मंत्री भी अपना निश्चित मत नहीं बना सके। यह अपने आप में मेरे साथ अन्य माननीय सदस्यों पर भी की गई गंभीर प्रतिकूल टिप्पणी का विषय भी रहा है। और आज भी माननीय कानून मंत्री असमंजस में हैं कि क्या इस महत्वपूर्ण बिल के लिए और दिन दिए जाएं अथवा नहीं। यदि ऐसा होता है, तो मुझे आशा है कि इस सप्ताह के अंत में यदि अल्प सूचना पर कोई बिल विचारार्थ लाया जाता है, तो आप वैसे किसी भी प्रस्ताव को निश्चित रूप से निरस्त कर देंगे।
माननीय अध्यक्षः चाहे कुछ भी हो, फिलहाल यह प्रश्न काल्पनिक ही आज तो हम इसी बिल पर चर्चा कर रहे हैं।
पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गव (अजमेर मेड़बाड़)ः यह स्पष्टता बहुत ही अनुचित है कि आज भी सरकार इस विषय पर निर्णय नहीं ले सकी है। 30 मार्च को आपने सहर्ष सदन के नेता से पूछा था कि क्या स्थिति है? श्री मैत्रेय द्वारा इस विशेष प्रश्न को भी प्रस्तुत किया था कि हिंदु संहिता पर कार्रवाई की जा रही है अथवा नहीं। तब सरकारी बेंच ने इस प्रश्न का उत्तर ‘न’ में दिया था। उसके बाद पहली बार में 31 को पता चला कि बिल पर कार्रवाई की जा रही है। श्री चौधरी जो चर्चा में भाग लेना चाहते थे, वे आशय से असम चले गए, यह सोचकर यह बिल सदन के समक्ष प्रस्तु नहीं होगा। इसलिए, ये स्पष्टतः सदस्यों के हित में नहीं है कि यह बिल इस तरह सदन में प्रस्तुत किया गया है। अध्यक्ष महोदय के पास सदस्यों के अधिकारों को संरक्षित रखने की पर्याप्त शक्ति है।
सेठ गोविंद दास (सी.पी. एवं बरारः सामान्य)ः आपको स्मरण होगा कि उस तारीख को सदन के नेता ने घोषणा की थी कि बहुत संभावना है कि दिनाक 7 अप्रैल को स्थगन हो सकता है। तब मैंने प्रश्न किया था कि इस सत्र में हिंदू संहिता विधेयक को विचारार्थ लाया जा रहा है अथवा नहीं। श्रीमान्, तब आपने यह कहा था कि ‘‘इस मामले में आपका कोई सरोकार नहीं है और यह सरकार का मामला है कि सदन की कार्यवाही की कर्मसूची तय करें। अब, इस सत्र के अवसान के दौरान जब कि कई सदस्य अनुपस्थित हैं, यह उचित नहीं है कि इस तरह के विवादस्पद विधेयक पर कार्यवाही शुरू की जाए। मैं, उन सदस्यों के साथ हूँ, जो अभी बोले हैं और मेरा कथन है कि इस सदन के सदस्यों के अधिकारों व विशेषाधिकारों का बचाव करना आपकी जिम्मेदारी है तथा यह निहित अधिकार आपके पास भी है। अतः मैं आपसे अनुरोध करता हूँ, कि सरकार से कहें कि इस सत्र को अवसान के दौरान और सदस्यों को बिना पर्याप्त सूचना दिए बिना, इस बिल पर कार्यवाही की जानी उचित नहीं है। मैं, आपसे अनुरोध करता हूँ कि विधेयक के विचारार्थ चरण पर इस चर्चा को कम से कम इस शाम तक स्थगित किया जाए ताकि सदन के अगले सत्र में, जब हम शरद्कालीन सत्र में मिलें, तब इस पर कार्रवाई की जा सके।