644 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय अध्यक्षः वर्तमान में यह प्रश्न मात्र एक है, क्योंकि कानून मंत्री ने यह नहीं कहा है कि चर्चा को न जारी रखने का प्रस्ताव है। अतः यदि सहमति हो, तो प्रश्न है कि प्रस्ताव पर आगे चर्चा कब की जाएगी (हस्तक्षेप)। उन्होंने कहा है कि यह ‘प्राथमिकता समिति’ के निर्णय पर निर्भर है। मैं भरसक प्रयत्न करूंगा और जहाँ तक सदन में मेरी शक्ति है, मैं सदस्यों की सभी न्यायसंगत एवं उचित मांगों को स्वीकार करूँगा। सरकारी कामकाज की व्यवस्था के प्रश्न पर मेरा मानना है कि यह थोड़ी ज्यादती होगी कि मुझसे हस्तक्षेप करने के लिए कहा जाए। और जहाँ तक इस बिल का संबंध है कि मेरा मानना है कि सदन में जो कुछ कहा गया है उसके परिप्रेक्ष्य में अन्य कुछ भी किए जाने की आवश्यकता नहीं है। चूँकि कामकाज की प्राथमिकताओं पर निर्णय लेने के लिए सरकार पूर्णतः सक्षम है, अतः मेरा मानना है कि वे भी सदस्यों की भावनाओं के प्रति जिम्मेदार है। अब हमें इस मामले में आगे जाने की आवश्यकता नहीं है। हमें विचाराधीन प्रस्ताव या आगे कार्यवाही शुरू कर देनी चाहिए।
श्री एच.वी. कॉमथ (सी.पी. एवं बरारः सामान्य)ः श्रीमान्, मैं आपसे जानना चाहता हूँ कि यहाँ सरकारी कामकाज की व्यवस्था में अंतिम निर्णय किसका होता है?
माननीय अध्यक्षः जहाँ तक सरकारी कामकाज का संबंध है, उसमें सरकार ही अंतिम निर्णायक है। अतः जहाँ तक प्राथमिकता का सवाल है, तो मेरी उस कार्यवाही में कोई दखल नहीं है।
सेठ गोविन्द दासः अंतिम प्राधिकार आपके पास ही है। यदि वे कोई भी मुद्दा सदन के समक्ष प्रस्तुत करना चाहते हैं तो प्रस्तुत कर सकते हैं। पर अंतिम प्राधिकार आपके ही पास है।
माननीय अध्यक्षः फिलहाल, माननीय सदस्यगण अपनी सुविधानुसार ऐसा सोचते हैं, पर मेरा मानना है कि मेरे लिए यह जिम्मेदारी काफी ज्यादा है। मैं, सभी ब्यौरों और सरकार की आवश्यकताओं से बाबस्ता नहीं हूँ। मेरा मानना है कि मैं इस तरह के मामलों में उनके कामकाज को समायोजित करने के उनके विवेक के साथ हस्तक्षेप नहीं कर सकता हूँ। माननीय सदस्यों के लिए श्रेष्ठ तरीका यही है कि सरकार को उनके मतों के दबाव की अनुभूति होने दी जाए। इसके बाद स्थिति को समायोजित किया जाए। मेरा प्रयास यही हो सकता है कि मैं देखूँ, कि एक सार्थक चर्चा हो सके। उपर्युक्त दृष्टिकोण के अनुसार मैं निश्चित रूप से वह करूँगा, जो मैं कर सकता हूँ।
सेठ गेविन्द दासः हम आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध कर रहे हैं।
माननीय अध्यक्षः सदस्यों के लिए ऐसा करने के लिए, कई अन्य माध्यम भी हैं।