646 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः मैं अब कुछ और कहने का इच्छुक नहीं हूँ। अब, मैं यही कहना चाहता हूँ कि सरकार का ऐसा कोई आशय नहीं है कि इस विधेयक को त्वरित मतदान द्वारा पारित कराया जाए।
माननीय अध्यक्षः अब, श्रीमान नजीरुद्दीन अहमद अपना भाषण समाप्त कर दें। मैं, भाषणों पर समय-सीमा लागू करना नहीं चाहता हूँ। उन्होंने कल सारे दिन अपनी बात रखी और मेरा मानना है कि पिछली बार भी उन्होंने 48 मिनट तक भाषण दिया था। सटीक रूप से कहा जाए तो कुल मिलाकर उन्होंने 3 घंटे और 28 मिनट का समय ले लिया है।
यहाँ मैं उनके भाषण की समय-अवधि के आधार पर पैमाइश नहीं कर रहा हूँ। लेकिन अब मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि इस तथ्य पर विचार किया जाए कि फिलहाल, विधेयक पर विचार करने के लिए यह एक सामान्य प्रस्ताव है।
अतः, इसकी प्रत्येक धारा का व्यवस्थित क्रम से विवरण नहीं दिया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना उचित नहीं होगा। जैसा मैं कल माननीय सदस्य के तर्क से समझ गया था कि इस विधेयक में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। इसलिए इस विधेयक को नया माना जाए अथवा इसको जनता के हेतु परिचालित किया जाए। अतः इस बहस को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें इस बिल की प्रत्येक धारा का विश्लेषण करने की आवश्यकता नहीं है। उन्हें मूल रूप से किए गए महत्वपूर्ण परिवर्तनों को सभी उदाहरणों सहित पेश करने की आवश्यकता नहीं है। मेरा मानना है कि वर्तमान स्तर पर यही उनकी बहस के लिए पर्याप्त होगा। बाद में जब विधेयक प्रत्येक धारा पर चर्चा के लिए प्रस्तुत हो, तो उन्हें किसी भी संशोधन का प्रस्ताव करने की सुविधा मिलेगी।
ऽश्रीमान नजीरुद्दीन अहमद (पं. बंगालः मुसलमान)ः श्रीमान् मैं इस सुझाव के लिए आपका शुक्रगुजार हूँ। मैंने कब महत्वपूर्ण परिवर्तनों के बारे में बताया था? आज, मैं स्वयं को कुछ अन्य महत्वपूर्ण परिवर्तन तक सीमित रखूँगा। (हस्तक्षेप)।
माननीय अध्यक्षः मुझे हस्तेक्षप के संबंध में एक कठिनाई की अनुभूति होती है। इससे मूल मुद्दे से ध्यान भटक जाता है और अध्यक्ष के रूप में मुझ पर दबाव पड़ने से मेरे लिए इसे जारी रखना और उन्हें चर्चा के दायरे में लाना कठिन हो जाता है। यदि, कोई हस्तक्षेप नहीं हो तो कम समय लेगा।
एक माननीय सदस्यः लेकिन तब काफी नीरसता आ जाएगी।
माननीय अध्यक्षः वस्तुतः इससे बोरियत से छुटकारा मिलता है लेकिन ऐसा ज्यादा होना सदन के लिए खतरनाक भी है।
ऽसी.ए. (विधि.) डी., खंड 3, भाग II, 2 अप्रैल, 1949, पृष्ठ 2249-76