हिन्दू संहिता - जारी... - Page 666

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‘‘उपधारा (1) के अंतर्गत नियम बनाने के लिए प्रांतीय सरकार उपबंध कर सकती है कि इसका उल्लंघन करने पर जुर्माना लगाया जाएगा जो रुपये 100 तक का हो सकता है।’’

यह टिप्पणी थोड़ी अस्पष्ट भी है, क्योंकि अनिवार्य शर्त का निर्वाहन पंजीयक अधिकारी से आवश्यक है अथवा वह पार्टी को संबोधित है? किंतु इस पर तफसील से चर्चा बाद में की जा सकती है।

श्री महावीर त्यागीः आप यहाँ किस धारा का हवाला दे रहे हैं?

श्री नजीरुद्दीन अहमदः विभागीय विधेयक की धारा 9 (2) के साथ अंतिम विधेयक की धारा 9 (2)। वस्तुतः प्रांतीय सरकार अनुपालन न करने वालों या उन पार्टियों पर, जिन्होंने कभी दर्ज न किया हो या इसे दर्ज भी कराया हो तो संदेह होने पर दण्ड लगा सकती है। इन्हें इस उपबंध के उल्लंघन का दोषी माना जाएगा।

बाद में इस मामले को संदेह के घेरे में नहीं छोड़ा गया है, बल्कि इसे स्पष्ट कर दिया है।

माननीय अध्यक्षः जिन मामलों में विवाह की वैधता प्रभावित नहीं होगी, वहाँ महत्वपूर्ण परिवर्तन हैं कहाँ? यह केवल विस्तृत चर्चा का मामला है। इस पर माननीय सदस्य भी बोल सकते हैं जब हम विधेयक की प्रत्येक धारा की विस्तृत चर्चा करेंगे।

श्री महावीर त्यागीः श्रीमान् यह महत्वपूर्ण मामला है। इस मामले में यह एक बड़ा परिवर्तन है। पार्टियों को निर्देश देना होगा कि अब ससुराल के बजाय पंजीयक के कार्यालय में जाएं।

माननीय अध्यक्षः मौजूदा चर्चा का दायरा पिछले कानून में किए गए परिवर्तनों के संदर्भ में हैं, जिसे राउ समिति ने प्रस्तावित किया था तथा प्रवर समिति ने ग्रहण किया। पंजीकरण का एक छोटा-सा ब्यौरा दिये जाना अनिवार्य है। जहाँ तक विवाह की वैधता का मामला है तो यह किसी भी दशा में प्रभावित नहीं होगा। मैं, इस पर अन्य कोई चर्चा नहीं कराना चाहता हूँ, मैं यह नहीं कहता कि परिवर्तन वांछनीय है अथवा नहीं, किंतु इस विषय पर अब चर्चा कराना विषयेत्तर चर्चा मानी जाएगी।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं उपरोक्त के साथ अंतिम बिल के संबंध में भी एक दो वाक्यों का हवाला देना चाहूँगा। धारा 138 नियम बनाने की शक्ति धारा 2, उप-धारा ( ii ) में उल्लेख हैः

‘‘वे मामले एवं दायरे, जिनमें सांस्कारिक विवाह के विवरण अनिवार्यतः दर्ज किये जाएंगे और इसका उल्लंघन करने पर दण्डख्...,’’