652 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस तरह यहाँ अनिवार्य पंजीकरण की व्यवस्था की गई है। मैं इस प्रश्न पर आ रहा हूँ कि यह कैसे विवाह को प्रकाशित करता है।
(एक माननीय सदस्यः ऐसा करना प्रांतीय सरकार के विवेक पर निर्भर है।’’) निःसंदेह यह प्रांतीय सरकार के विवेक पर है। लेकिन उस सरकार को एक नई शक्ति दी गई है, जिसे प्रयुक्त किया जा सकता है।
मैं पुनः विभागीय विधेयक की धारा 6 पर आता हूँ। यह अंतिम विधेयक की धारा 6 के समतुल्य हैः
‘‘हिंदुओं के मध्य कोई भी विवाह तब तक मान्य नहीं होगा, जब तक उसे वर्तमान प्रावधानों के सांस्कारिक विवाह या सिविल विवाह के तौर पर मान्यता न दी गई हो।’’
मूल विधेयक की धारा के अनुसार ये औपचारिकताएँ जरूरी नहीं थीं। विभागीय विधेयक हैः ‘‘ इस भाग के प्रावधान’’ के अनुसार विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है। वस्तुतः सांस्कारिक विवाह और सिविल विवाह को एक-दूसरे के समतुल्य कर दिया गया है। पहले केवल सिविल विवाह का पंजीकरण अनिवार्य था। विभागीय विधेयक की धारा 6 की वाक्य-संरचना में परिवर्तन के साथ पंजीकरण की अनिवार्यता के संयुक्त प्रभाव के फलस्वरूप ऐसा प्रतीत होता है कि कोई विवाह जो इस धारा के अनुसार पंजीकृत नहीं है, और जिसका विवरण दर्ज नहीं किया गया है, वह अवैध विवाह होगा। अतः कोई भी विवाह वैध नहीं होगा जब तक उससे इस भाग के अनुसार पूरा न किया गया हो।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः यह कहाँ लिखा है?
श्री नजीरुद्दीन अहमदः यह मेरी व्याख्या है, जिसे मैं सदन के विचारार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ। वस्तुतः यह माननीय कानून मंत्री के जहन से काफी दूर है कि वे इसके परिणामों के प्रभाव को जान सकें। उन्होंने अपने भाषण में यह स्पष्ट किया है कि विवाह से संबंधित प्रावधान अनिवार्य नहीं हैं, बल्कि वैकल्पिक हैं। यह भी हो सकता है कि ये प्रभाव अनभिप्रेतित थे, किंतु चाहे यह अभिप्रेतित या नहीं, अभाव तो है ही। तदनुसार कोई भी विवाह वैध नहीं होगा, जब तक कि उसे इस भाग के अनुसार विधिवत पूरा न किया गया हो। तो और इस चूक के लिए जुर्माने का भी प्रावधान है। सदन अनिच्छुक है या विधेयक का मसौदाकार इस व्याख्या को अमान्य कर सकता है, फिर भी यह व्याख्या का प्रश्न है, मानो यह भावना का प्रश्न नहीं है। मुद्दा यह है कि क्या यह व्याख्या वैध है? यदि ऐसा है, तो यह बहुत ही महत्वपूर्ण परिवर्तन है। यद्यपि यह परोक्ष रूप से ही बताता है की कोई विवाह अवैध होगा यदि उसे पंजीकृत न किया गया हो, यह एक भयावक प्रस्तावना होगी तथा इससे कानून का घोर उल्लंघन हो जाएगा। पंजीयक अधिकारी उन पार्टियों से काफी दूरी पर हो सकता है, जो दुर्गम क्षेत्रों में रह रही हैं