हिन्दू संहिता - जारी... - Page 670

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अब, मैं कूल विधेयक के भाग VI पर आता हूँ जो ‘दत्तकग्रहण’ से संबंधित है। इसकी धाराओं 1 और 2 को छोड़ दिया गया है। विभागीय विधेयक की धारा 55 और अंतिम विधेयक की धारा 55(1) तथा उप-धारा बिल्कुल नई धाराएँ हैं। पुनः, मूल विधेयक की भाग VI की धारा 19 की उप-धारा को छोड़ दिया गया है। एक नई धारा पूर्णतः भिन्न शर्तों के साथ प्रस्तावित की गई है। विभागीय विधेयक की धारा 68 जो अंतिम विधेयक धारा 68 के समतुल्य है, की उप-धारा (1) एक नई धारा है। वहाँ दोनों विधेयकों की धारा की उप-धाराओं से संबंधित उपाबंध भी नए हैं पुनः मूल विधेयक की धारा 19 की उप-धारा (3) के साथ उसकी दो शर्तों को अंतिम विधेयक से पूर्णतः हटा दिया गया है। पुनः इस धारा की उप-धारा (5) को हटा दिया गया है। इसी प्रकार, मूल बिल (भाग VI ) की धारा 21 को हटा दिया गया है। भाग VI में मूल विधेयक की धारा 25 के साथ दो उप-धाराएँ और दो अन्य भाग की पूर्वतः हटा दिए गए हैं। अतः मेरा कहना है कि विभागीय विधेयक द्वारा अत्यंत महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। यद्यपि यह स्पष्ट है कि प्रवर समिति के माननीय सदस्यों ने अनुभव किया है कि विभागीय विधेयक में किए गए परिवर्तनों को प्रस्ताविक किया गया था, किंतु आश्वासन के मद्देनजर यह भी महसूस किया गया है, कि कोई परिवर्तन नहीं किए गए हैं। वस्तुतः उनके ब्यान को विशेष रूप से आकर्षित नहीं किया गया था, और इसका भय है कि उन्होंने कभी इन विवरणों पर पूर्णतः विचार नहीं किया है। ऐसा नहीं होता, यदि वे अपना ध्यान मूल विधेयक पर रखते और प्रत्येक धारा के अनुसार कार्यवाही करते या वे पहले स्वयं बैठते और फिर इसे तैयार करने के लिए विभाग को निर्देश देते।

माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य उसी बात को उजागर कर रहे हैं जो उन्होंने कल कहीं थीं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः श्रीमान्, मैं उन्हीं बातों को दुबारा दोहराने का इच्छुक नहीं हूँ। इस परिप्रेक्ष्य में मेरा कहना है कि साधारण-सी बात यह है कि यह एक महत्वपूर्ण मामला है, क्योंकि इस विधेयक के उचित एवं पूर्ण विचार के संबंध में प्रवर समिति पूर्वाग्राही रही है।

मैं प्रवर समिति के सदस्यों पर कोई दोषारोपण नहीं करना चाहता हूँ किंतु प्रत्येक धारा की उचित तुलना किए बगैर प्रवर समिति के सदस्यों के लिए भी यह काफी कठिन हो जाएगा कि वे सभी परिवर्तनों को समझ सकें।

हम इसके बाद इस विधेयक से संबंधित अन्य मामलों पर आते हैं। उत्तराधिकार का मुद्दा लम्बे समय से देश की सोच को उद्वेलित कर रहा है। मेरा मानना है कि इस विधेयक में पुत्री की स्थिति पर एक बहुत ही विवादित उपबंध है। वस्तुतः मुझसे पूछा गया था कि क्यों है कि मैं अपनी हिंदू बहनों को देने से मना कर रहा हूँ, जबकि मैंने अपनी मुस्लिम बहन को दे रहा हूँ। इसका उत्तर भी बहुत आसान है।