656 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
मुस्लिम कानून के मुताबि, पुत्र को हिस्सा दिया जाता है और इस कानून को कई अन्य परिप्रेक्ष्यों, इतिहास, समाज एवं अन्य बातें, जो इसकी तसदीक करती हैं के संदर्भों के साथ बनाया गया है। यहाँ एक प्रकार का न्याय है जिसे मुस्लिम समाज 1350 वर्षों से सहन और स्वीकार कर रहा है। किंतु हमारी हिंदू बहनें विभिन्न प्रथाओं के तहत लगभग 3 से 4 हजार वर्षों से इसे सहन कर रही हैं। जहाँ तक दो प्रथाओं के मध्य पुत्री की स्थिति की तुलना का संबंध है तो यह बिल्कुल सुसंगत नही होगा। असल में, कानून की दो प्रथाएँ उनके मामलों को भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण से देखती हैं और ये विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित हैं मुस्लिम कानून के तहत उत्तराधिकार की पद्धति पुराने अरबी रीति-रिवाजों से ग्रहण की गई हैं। ऐसा स्पष्ट एवं अनिवार्य परिस्थिति के कारण हुआ था। अरब में कोई अचल संपत्तियाँ नहीं थीं। वहाँ रेगिस्तान था, इसलिए केवल चल संपत्तियाँ थीं। जब एक व्यक्ति की मृत्यु होती थी...
श्री तजामुल हुसेन (बिहारः मुस्लिम)ः सूचना के तहत मैं पूछना चाहता हूँ कि माननीय सदस्य ने कहा कि अरब में कोई अचल संपत्ति नहीं थी। तब वे वहाँ के घरों के बारे में क्या कहेंगे?
श्री नजीरुद्दीन अहमदः यह प्रश्न अनावश्यक है। मैं माननीय सदस्य को बताऊंगा कि जर्मन वासी बॉन क्रेमर की साहित्यिक पुस्तक ‘दी ओरिएंट अन्डर द कालफिस’ पढ़ें। इस पुस्तक में वांछित सूचना प्राप्त हो जाएगी। इसका अनुवाद स्वर्गीय खुदा बक्श ने किया है। इस विषय पर केवल यही पुस्तक है। इस पुस्तक में एक विशेषज्ञ के दृष्टिकोण से संपूर्ण विषय पर लिखा गया है। मैं विनम्रतापूर्वक अपने माननीय मित्र को बताना चाहता हूँ कि अन्य जानकारी के लिए भी इस पुस्तक को पढ़ें। किंतु मैं सदन में इसका संपूर्ण विवरण देना चाहता हूं, क्योंकि ऐसा करना अपेक्षित नहीं है।
मेरा अभिप्राय था कि मेरे विद्वान मित्र का यह प्रश्न कि वहाँ अचल संपत्ति नहीं है वास्तव में यहाँ प्रश्न ही नहीं उठता है। अरब में निश्चित तौर पर कुछ अचल संपत्ति भी होती है, किंतु अधिकांश लोगों के पास अचल संपत्ति नहीं होती है। (हस्तक्षेप) कोई अन्य हस्तक्षेप नहीं। मुझे मानवीय अध्यक्ष महोदय ने कहा है कि हस्तक्षेप का खेद जताया पर बुरा न मानें, परंतु यह मुश्किल ही है कि कार्यवाही के दौरान अपने कान बंद कर लूँ।
एक माननीय सदस्यः तो मुंह बंद कर सकते हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं यथाशीघ्र संतुष्ट हो जाने पर कि मैंने अपने कर्तव्य का निर्वहन कर लिया है और जैसे ही मुझे महसूस होगा कि अधिकतर सदस्य मुझे सुनना नहीं चाहते, तो मैं वो भी निश्चित तौर पर कर लूँगा।