662 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
परिवार में उसकी हैसियत अविवादित होती है। क्या कोई ऐसी महिला है, जिसे परिवार में सम्मान अथवा प्रेम नहीं मिलता? क्या उसकी कोई व्यक्तिगत आवश्यकता होती है? क्या उसे अपने पति, भाईयों और अपने बच्चों और अपने भाईयों के बच्चों के हित के अलावा और कुछ चाहिए होता है? यही हिन्दू परम्परा है। लेकिन यह अच्छी है अथवा बुरी, इस पर मुझे यहाँ चर्चा नहीं करनी है।
एक माननीय सदस्यः बिल्कुल सही है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः यह हिंदू समुदाय पर है। यह उस समुदाय पर है कि वह कह सकता है कि क्या जो व्यवस्था पिछले चार हजार वर्षों से चल रही है...
बाबू रामनारायण सिंहः उससे भी अधिक समय से।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः वह ऐसा कह सकते हैं कि क्या वह वास्तव में इतनी बेकार और इतना जर्जर हैं- डॉ. अम्बेडकर के कथनानुसार-कि इसकी पूरी तरह मरम्मत आवश्यक है, कि इसे तोड़ने और पुनस्थापित करने की आवश्यकता है। और क्या वास्तव में हिंदू समाज में उक्त राहत और पुनर्वास से संबंधित कोई समस्या उत्पन्न हुई है? मैं सोचता हूँ कि ऐसा अभी कुछ भी नहीं है। इसलिए यह समस्या मात्र एक बौद्धिक क्रांति की है। यह विधिक सिद्धांत की भी मात्र एक कल्पना है। यह समानता का एक अनावश्यक सटीक प्रश्न है जो इस बँटवारे के मूल में है, यही समस्त चर्चा में है और विद्वेषपूर्ण भी है। अन्यथा यह सब एक सरल कार्य है। क्या आप अपनी पारिवारिक व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं? या यह आपको संतोष प्रदान करती है? क्या इस व्यवस्था ने समय के थपेड़ों से आपकी रक्षा की है?
डॉ. मॉन मोहन दास (पं. बंगालः सामान्य) इससे देश की मुस्लिम जनसंख्या में वृद्धि हो गई है।
माननीय अध्यक्षः ऑर्डर, ऑर्डर। हमारे समक्ष यहाँ सामाजिक ढांचे का विषय नहीं है। हम केवल हिंदू संहिता में दिए गए कुछ प्रावधानों पर चर्चा कर रहे हैं। इस पर हम बहुत अधिक विस्तार में न जाएं या अन्य प्रश्नों पर बात न करें। अन्यथा मुझे माननीय सदस्य से उनकी बात समाप्त करने को कहना पड़ेगा।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः यदि आप पुत्री को सम्पत्ति में हिस्से की अनुमति देते हैं, तो बड़ी संख्या में टाल-मटोल होगी, और वसीयतों से संबंधित अनेक मामले सामने आएंगे। पिता की मृत्यु के बाद, वसीयतों को बढ़ावा मिलेगा। पुत्र सम्पत्ति को अपने हक में रखने का प्रयास करेंगे और ऐसा हो सकता है कि मरता हुआ पिता दबाव में आकर वसीयत तैयार कर दे अथवा वसीयतें गढ़ी जा सकती हैं। यानी ऐसी स्थितियां बन सकती हैं। वास्तव में, यह कुछ ऐसे मामले हैं, जिन पर यहाँ पर विचार किया जाना चाहिए।