668 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
के द्वारा एक पुत्र पाने की इच्छा हो, तो न्यायालय की शरण में जाने की प्रवृत्ति बढ़ती ही जाएगी। अब, मान लीजिए कि एक व्यक्ति अपनी पत्नी से तलाक ले लेता है, तो उस महिला का क्या होगा? वह कहां जाएगी? तलाक हो जाने के बाद, वह पति-विहीन हो जाएगी, और नैतिक मूल्य विहीन तथा जीवन-यापन के भौतिक साधनों से विहीन हो जाएगी? तब कौन उस महिला का मित्र बनेगा? क्या इस विधेयक के प्रयोजक? मैं नहीं सोचना कि वे आगे कदम बढ़ाएंगे। क्या वह अपने भाई का सहारा लेगी? नहीं। क्या वह उस पति, जिसने उसे त्यादा दिया है? के भले के लिए अपने पारिवारिक सम्पत्ति का एक हिस्सा लेकर अपने भाई को विरोधी नहीं बन चुकी होगी? परिणाम यह होगा कि उसके दुखों के प्रति उसके पिता की भावना भी पूरी तरह उदासीन हो चुकी होगी। तो वह किस प्रकार अपना जीवन-यापन करेगी?
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडकरः वह नजीरुद्दीन अहमद से विवाह कर लेगी।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः श्रीमान्, मैं नहीं सोचता कि कोई तलाकशुदा महिला, जिसमें अपने बारे में समझ होगी, मुझे चुनेगी। मैं सोचता हूँ कि माननीय मंत्री महोदय का चयन बेहतर होगा।
माननीय उपाध्यक्षः ईश्वन न करे कि ऐसा कुछ घटित हो। हमें यहाँ चर्चा नहीं करना चाहिए।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः इसमें अध्यक्ष़्ा महोदय को मेरी ओर से कुछ गंभीर बात सुनाने का आशय नहीं था।
माननीय उपाध्यक्षः किन्तु मैं गंभीर हूँ। माननीय सदस्य को माननीय मंत्री महोदय से यह टिप्पणी इसलिए सुनने को मिली थी, क्योंकि उन्होंने पूछा थाः ‘वह महिला कहां जाएगी?’
माननीय डॉ. बी.आर. अम्बेडरकरः क्योंकि वह इतनी संवेदना के साथ अपनी बातें व्यक्त कर रहे थे, कि मैंने वह सुझाव उनकी बुद्धिमानी के लिए दिया था।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैंने इस पर कोई नाराजगी नहीं जताई। मैंने इस मजाक का पूरा आनंद लिया है। किन्तु मजाक की बात छोड़कर, मैं गंभीरता पूर्वक पुनः पूछता हूँ कि वह कहां जाएगी? एक तलाकशुदा यूरोपियन महिला का मामला लें। उसके पास संसाधन हैं। वह शिक्षित है। वह कोई नौकरी पा सकती है। वह एक शार्टहेन्ड-टाइपिस्ट बन सकती है। वह हमारे किसी भी दूतावास में नौकरी कर सकती है और जहाज में निशुल्क लिफट प्राप्त कर सकती है तथा वेतन और भत्ते प्राप्त कर सकती है। ऐसी महिलाएं पूर्णतया स्वतंत्र होती है। वे अजनबियों के साथ मित्रता कर सकती हैं। वह प्रशिक्षित होती हैं और आत्मनिर्भरता की आदी होती हैं।