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बाबू रामचरण सिंहः नहीं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः ...जो लोगों के वर्गों यानी 30 करोड़ लोगों को, उनकी सहमति के बिना प्रभावित करेगा? मैं यहां सभी परिवर्तनों का विरोध करने नहीं आया हूँ। मैं यहां उस परिवर्तन का विरोध करने आया हूँ, जो जनता की राय से स्वीकृत नहीं हुआ है। आपको ऐसा कौन-सा नैतिक अधिकार प्राप्त है कि आप उनकी स्वीकृति के बिना कठोर परिवर्तन कर दें?
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः हमने उनकी सहमति प्राप्त कर ली है_ हम उनका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः तो आपने एक बहुत महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठा दिया है। इस सदन का चुनाव संशोधन का प्रारुप तैयार करने के उद्देश्य से किया गया था...
माननीय उपाध्यक्षः जहां तक संवैधानिक मुद्दे का प्रश्न है मैं जानता हूँ कि इस संबंध में माननीय अध्यक्ष द्वारा पहले से ही एक नियमावली उपलब्ध करा दी गई है। यह एक प्रभुसत्ता संपन्न निकाय है जो कोई भी कानून बना सकती है। यदि माननीय सदस्य के पास अन्य आधार हों, तो वह अपनी बात जारी रख सकते हैं।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैं सदन के प्राधिकार का खण्डन नहीं कर सकता। हमें हिन्दू समाज अथवा मुस्लिम समाज को नष्ट करने और उन्हें किसी नए धर्म-विहीन समाज में शामिल करने का अधिकार है। इस अधिकार पर कभी भी कोई विवाद नहीं है। किन्तु प्रश्न यह है कि क्या जनता इस कानून के साथ है?
मुझे विश्वास है कि वे इस कानून के साथ नहीं हैं, वे इसके विरुद्ध हैं। (एक माननीय सदस्यः ‘वे इसके साथ है।’) आप कैसे जानते हैं कि वे इसके साथ हैं? इस अत्यधिक महत्व के मामले को निर्वाचकों के समक्ष रखा जाना चाहिए। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है। वास्तव में परसों श्री ओस्बर्न ने हमें बताया था कि वह कुछ चीजों को शामिल करने को तब तक सहमत नहीं होंगे, जब तक कि उन मामलों को विशेष रूप से निर्वाचकों के समक्ष न रखा जाए और उनके द्वारा अनुमति न दे दी जाए। वास्तव में वे ऐसा कुछ नहीं कर सकते। वे निर्वाचकों की सहमति के बिना एक संवैधानिक तरीके से कार्रवाई के लिए स्वयं को असक्षम समझते है। परन्तु हम अब इतने उच्च हो चुके हैं कि हम निर्वाचकों की असहमति को भी सहन कर सकते हैं। वस्तुतः एक बार यह चर्चा हुई थी कि सविस्तार वर्णन करने का अभिप्राय उद्देश्य को समाप्त करना होता है। इसलिए यदि कोई चुनाव होगा तो हिंदू कोड पारित नहीं होगा। इस सत्र में यह चर्चा भी पूर्णतया विपरीत रुख में हुई है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने यह दिखा दिया है कि निर्वाचक हमारे साथ हैं। यह उनकी स्वीकृति ही है कि यह विधेयक यहाँ