674 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
लाया गया है। लेकिन ऐसा न हो तो उनकी स्वीकृति और न उनकी सहमति है कि आप इस कानून को यहाँ लाए हैं।
इस कानून की शुरूआत कैसे हुई। इसका सृजन एक विदेशी सरकार के प्राधिकार के अंतर्गत हुआ जो उस समय अपना अस्तित्व बचाए रखने को लेकर संघर्षशील थी। अंग्रेजी सत्ता अपने पूर्ण उन्मूलन के डर से भयाक्रांत थी। ब्रिटिशों के लिए यह जीवन और मृत्यु का संघर्ष था। यहीं वह समय था जब एक गृह सदस्य, सर रेगीनाल्ड मैक्सवेल ने राउ समिति की नियुक्ति की। इस प्रकार यह सृजन-प्रक्रिया एक विश्व युद्ध के दबाव की छांव में शुरू हुई, जब इंग्लैण्ड का अस्तित्व खतरे में था। जब यह विधेयक तैयार हुआ था, इसका प्रस्ताव अंतरिम सरकार के कानून मंत्री श्री जोगेन्द्र नाथ मंडल द्वारा रखा गया था। उस समय देश में विनाशकारी संघर्ष का दौर था, जान-माल की व्यापक हानि हुई और अभूतपूर्व पैमाने पर शांति भंग हो रही थी। वह समय था, जब तत्कालीन मंत्री जानते थे कि उनका कार्यकाल अस्थायी है, जब उनका ध्यान पहले से ही पाकिस्तान पर केन्द्रित था और इसलिए इस विधेयक में उनकी कोई रुचि नहीं बची थी। यह वे परिस्थितियां थीं, जब विधेयक सदन के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। वस्तुतः उस समय तक पाकिस्तान एक परिकल्पना से अधिक समय था, जब विधेयक संसद में लाया गयाख्...,
माननीय उपाध्यक्षः मैंने देखा है कि यहां अनेक व्यक्ति प्रतीक्षा सूची में हैं। माननीय सदस्य पहले ही डेढ दिन का समय ले चुके हैं। वह अपनी बात कब समाप्त करना चाहेंगे? क्या उन्हें स्वयं कोई अनुमान हैं?
एक माननीस सदस्यः इस सदन में किसी को कोई अनुमान नहीं है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः यहां तक कि कानून मंत्री को भी कोई अनुमान नहीं है। वास्तव में यह टिप्पणी इस हस्तक्षेप के फलस्वरूप निकली है। अभी मैं कुछ समय और ले सकता हूँ।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः कितना समय? सदन जानने की इच्छुक है।
श्री नजीरुद्दीन अहमदः सदन यह जानने का पात्र था कि विधेयक पर कितनी देर तक विचार-विमर्श होगा, पर इसका कोई उत्तर नहीं दिया गया। इसीलिए मेरी स्थिति और कठिन हो गई है।
तत्पश्चात् सदन दोपहर के भोजन अर्थात् 2.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।