हिन्दू संहिता - जारी... - Page 691

676 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

समिति को भेजा गया था। तब कानून मंत्री को मालूम हुआ कि विधेयक का प्रारूप उचित ढंग से तैयार नहीं किया गया था और इसमें संशोधनों की आवश्यकता थी। भले ही वे संशोधन महत्वपूर्ण थे अथवा नहीं, यह एक अलग मुद्दा है। किन्तु इसमें पूरी तरह संशोधन की आवश्यकता थी। अतः उन्होंने संपूर्ण विधेयक का प्रारुप पुनः तैयार किया। वस्तुतः उस समिति का परिणाम एक पुस्तक के रूप में सामने आया जिसे फ्द हिंदू कोडय् कहा गया और जो बिल्कुल वैसी ही है, जैसा कि उसे संशोधित विधेयक में प्रस्तुत किया गया है और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, कानून मंत्री द्वारा इसका आशय फ्एक विधेयक जो हिंदू कानून की विभिन्न धाराओं को संशोधित और वर्गीकृत करता है,य् के रूप में व्यक्त किया गया है। इस प्रकार जो विधेयक श्री जोगेन्द्र नाथ मण्डल द्वारा प्रस्तुत किया गया था, उसे बाद में डॉ. अम्बेडकर द्वारा भी एक नए विधेयक के रूप में ही परिवर्तित कर दिया गया। मैं जिस मुद्दे की बात कर रहा हूँ, वह यह है कि विधेयक पर कभी भी कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ है, न ही सरकार ने जब पहली बार इसे प्रायोजित करने का प्रयास किया उससे पूर्व उस पर कोई उपयुक्त विचार-विमर्श किया गया। वस्तुतः जैसे ही यह पता लगा कि विधेयक का प्रारुप उचित रूप से तैयार नहीं किया गया, और इसे पूर्णतः पुनः लिखे जाने की आवश्यकता है और इसके विवरणों में बड़ी मात्रा में परिवर्तनों की आवश्यकता है, तो वही समय था जब विधेयक को वापस ले लिया जाता। किन्तु इसे वापस लिए बिना कानून मंत्री ने इसमें अनेक परिवर्तन किए और एक नया विधेयक प्रस्तुत कर दिया। इससे प्रतीत होता है कि विधेयक पर कभी भी विस्तृत विचार-विमर्श नहीं हुआ। यदि यह तथ्य है कि संपूर्ण विधेयक में गंभीर परिवर्तन करने के बारे में सरकार को भी अपना विचार बदलना पड़ा था, तो इससे यही प्रतीत होता है कि अपने अभूतपूर्व स्रोतों के साथ सरकार इसे स्वीकार करने में सफल नहीं रहीµन ही देश ने इसे स्वीकार किया।

श्रीमान्, इस वर्तमान विधान परिषद का चयन एक विशिष्ट उद्देश्य से किया गया है।

श्री तजामुल हुसैनः मुझे डर है कि माननीय सदस्य वहीं बातें दोहरा रहे हैं।

माननीय अध्यक्षः मुझे नहीं मालूम कि उन्होंने क्या यह सब कुछ कह दिया है।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः उन्होंने यह सब सुबह कह दिया है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैंने बामुश्किल इस पर बात शुरू की थी। इस सदन का चुनाव इस कानून को पारित करने के लिए नहीं हुआ था।

श्री तजामुल हुसैनः श्रीमान्, उन्होंने बिल्कुल यही कहा था। यह सब आपकी अनुपस्थिति में कहा गया था।