हिन्दू संहिता - जारी... - Page 692

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श्री नजीरुद्दीन अहमदः कृपया मुझे अपनी बात को आगे बढ़ाने दें। प्रश्न यह है कि क्या इसके लिए हमें प्राधिकृत किया गया है। वास्तव में इस सदन का प्राधिकार एक अप्रत्यक्ष चुनाव पर आधारित है_ क्योंकि कोई प्रत्यक्ष चुनाव नहीं हुआ था।

श्री एच.वी. कॉमथः यही बात उन्होंने पहले कही थी और उपाध्यक्ष महोदय ने इस मुद्दे पर नियम का हवाला दिया था।

माननीय अध्यक्षः यदि उन्होंने ऐसा कहा था तो मैं यह बात माननीय सदस्य पर छोड़ता हूँ, क्योंकि मैं स्वयं यह नहीं जानता।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः श्रीमान्, मैं इसे विस्तार से बताना चाहता हूँ।

माननीय अध्यक्षः इसे विस्तार से बताने की आवश्यकता नहीं है। अब वह अगले मुद्दे पर आ सकते हैं।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः उस समय दोपहर के भोजन का समय हो गया था।

माननीय अध्यक्षः यह बहुत स्पष्ट प्रतीत होती है और इसकी कोई व्याख्या करने की आवश्यकता नहीं है कि इस सदन का चुनाव प्रत्यक्ष मतों द्वारा नहीं हुआ है, या यह कि चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से हुआ है, और इसका चुनाव एक विशिष्ट उद्देश्य अर्थात् संविधान के निर्माण के लिए किया गया था, इसलिए इस स्तर पर यह मुद्दा इस प्रकार के कानून के लिए नहीं उठाया जाना चाहिए। इस मुद्दे पर ज्यादा चर्चा की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि माननीय सदस्य का इस मुद्दे पर ही अधिक समय लगाने का विचार है, तो मैं उनका समर्थन करने में असमर्थ हूँ।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मुद्दा यह है कि जैसे ही मैंने अपनी बात आरंभ की श्री कृष्णास्वामी भारती ने इसका विरोध कर दिया।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः श्रीमान्, यहां इस मुद्दे पर व्यक्तिगत स्पष्टीकरण जरूरी है। मैंने उस समय कुछ नहीं कहा था।

माननीय अध्यक्षः कोई सदस्य विशेष किसी बात को दावे के साथ कहता है अथवा उसके लिए मना करता है, पर यदि वास्तविक तथ्य रखे गए हैं, तो उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता। यदि उसे प्राधिकार है तो है, यदि नहीं तो नहीं है। किसी एक सदस्य द्वारा एक या किसी दूसरे तरीके से दावे के साथ कोई बात कही जाती है, उससे वस्तुतः कोई अन्तर नहीं पड़ता। अतः कृपया विवरणों का उल्लेख किए बिना अपनी बात रखें।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः प्रश्न यह है कि यह इतना सुस्पष्ट नहीं है।

माननीय अध्यक्षः यह सुस्पष्ट है।