हिन्दू संहिता - जारी... - Page 693

678 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री नजीरुद्दीन अहमदः नहीं, श्रीमान्, श्री भारती के समक्ष यह सुस्पष्ट नहीं है।

माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य को ऐसे सदस्य को संतुष्ट करने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, जो संतुष्ट होना ही नहीं चाहते। वह पूरे सदन को संबोधित कर रहे हैं। उन्हें पता होना चाहिए सदन में ऐसे सदस्य हैं, जिन्हें काफी कुछ समझ है।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः मैंने जिस बात के लिए मना किया है, वह समझ की बात नहीं है। वह बात है दिमाग को बंद कर लेने की कठिनाई यही है। कुछ व्यक्ति संतुष्ट होना ही नहीं चाहते।

माननीय अध्यक्षः उन्हें संतुष्ट नहीं किया जा सकता। हम अपना समय उन्हें संतुष्ट करने के लिए व्यतीत न करें। माननीय सदस्य अपना अगला मुद्दा रखें।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः अतः आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि हमें यह कानून पारित करने के लिए हमें कोई नैतिक प्राधिकार प्राप्त नहीं है। वस्तुतः, सरकार ने एक विधेयक तैयार किया, तत्पश्चात् उसे परिचालित करने के लिए भेज दिया। मैं द्वितीय हिंदू कानून समिति की रिपोर्ट के पृष्ठ 41 परप परिशिष्ट- II का उल्लेख करता हूँµफ्राउ समिति द्वारा तैयार विधेयक को परिचालित करने के लिए भेजा गया था और विधेयक को बड़ी संख्या में जन निकायों तथा प्रतिष्ठित व्यक्तियों और प्राधिकरणों को भेजा गया था तथा उनकी राय मांगी गई थी।य् 5 अगस्त, 1944 की अधिसूचना में यह पूर्णतया स्पष्ट किया गया था कि हिंदू कानून समिति जनता की राय के परिप्रेक्ष्य में प्रारुप को उस रूप में संशोधित करने की इच्छुक है, जैसे कि उसके द्वारा लिखित और मौखिक तौर पर बताया गया है। यह बहुत महत्वपूर्ण पक्ष है और इसके लिए वर्तमान स्थिति के रहस्य पर से परदा उठना चाहिए। विधेयक को जनता की राय के लिए प्रस्तुत किया गया था और उसमें यह स्पष्ट कहा गया था कि विधेयक को जनता की राय के अनुरूप संशोधित किया जाएगा। जनता की क्या राय थी? मामले के एक चरण में जनता की राय फ्हिंदू कानून समिति, खंड I एवं II में प्रस्तुत लिखित बयानय् में निहित है। मेरा मानना है कि सदन के सदस्यों द्वारा इस राय पर कभी भी पर्याप्त विचार-विमर्श नहीं किया गया अथवा सदन के अनेक सदस्यों द्वारा इस पर कभी भी विचार नहीं किया गया। जब ये सम्मतियाँ प्राप्त हुईं, तो इनका विश्लेषण किया गया था, उसके बाद मौखिक साक्ष्य भी आंतत्रित किए गए और बड़ी संख्या में गवाहियों की जांच भी की गई थी। इनका विवरण फ्हिंदू कानून समिति के समक्ष वर्ष 1945 में प्रस्तुत किए गए मौखिक साक्ष्यय् में देखा जा सकता है। इन खंडों का यदि विश्लेषण किया जाए और इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ा जाए,