हिन्दू संहिता - जारी... - Page 695

680 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जैसा है और जिन परिस्थितियों में रचा गया है, वे अभी प्रचलन में नहीं है। अब एक पूर्ण-रूपेण लोकतंत्र का समय है और इसमें जनता की राय को माना जाना चाहिए तथा वैधानिक प्रस्तावों को प्रभावी बनाते समय उनका पालन किया जाना चाहिए। अतः मेरा कहना है कि जहां तक लिखित राय का प्रश्न है, वह विधेयक के विरुद्ध है, किन्तु अलिखित राय क्या है? हमने आपके कार्यालय में बड़ी संख्या में विरोध दर्ज होते देखे हैं और हमने बड़ी संख्या में बैठकों की कार्यवाहियों को सुना है। वास्तव में हमने इस शहर के बीच भी बैठकों का आयोजन किया हैं। बैठकों में भारी उपस्थित रही है और कई माननीय सदस्य और माननीय कानून मंत्री भी उनमें आमंत्रित किए गए हैं, कुछ सदस्य उपस्थित हुए, किन्तु कानून मंत्री शामिल नहीं हुए।

बाबू रामनारायण सिंहः उनमें उपस्थित होने की हिम्मत नहीं थी।

श्री नजीरुद्दीन अहमदः उन्होंने उपस्थित होना आवश्यक नहीं समझा, क्योंकि मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि जहां तक विधेयक का संबंध है, उनके लिए जनता की राय कोई मापदण्ड अथवा मार्गदर्शन नहीं है। वास्तव में, डॉ. डी.एन. मित्तर ने जनता की राय के संबंध में एक स्पष्ट विश्लेषण प्रस्तुत किया है। माननीय कानून मंत्री ने कहा है कि वह डॉ. डी.एन. मित्तर का खंडन करने के लिए उनके एक पूर्व विश्लेषण का उद्धरण देंगे।

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