684 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(2) जहां एक से अधिक पत्नियां हों वहाँ किसी एक या सब को दत्तकग्रहण का
अधिकार दिया जा सकता है या निषेध किया जा सकता है।
(3) जहां किसी हिंदू ने, जो अपने पीछे दो या दो से अधिक विधवाएं छोड़ गया है_
किसी एक को या अधिक को स्पष्ट रूप से एक पुत्र के दत्तकग्रहण का अधिकार
दिया है तो उसे अन्य के दत्तकग्रहण को निषिद्ध करना होगा।
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57. अधिकार देने, निषेध करने या उसी को रद्द करने का तरीका ः
(1) दत्तकग्रहण का अधिकार देने या निषेध करने की मान्यता तब तक मान्य नहीं होगी
जब तक उसे भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 (1908 का XVI ) के तहत
पंजीकृत माध्यम द्वारा जारी न किया गया हो या भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम,
1925 (1925 का XXXIX ) की धारा 63 के तहत वसीयत द्वारा न किया गया
हो_
(2) इस प्रकार प्रदत्त किसी भी अधिकार या निषेध को पूर्व उद्धृत पंजीकृत दस्तावेज
या वसीयत द्वारा रद्द किया जा सकता है_
(3) वसीयत द्वारा प्रदत्त अधिकार या लगाए गए निषेध को भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम
की धारा 70 के अनुसार अन्य तरीकों से भी रद्द किया जा सकता है, जैसा कि
भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925 (1925 का XXXIX ) की तीसरी अनुसूची
में बदलाव किया गया है।
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55. विधवा की दत्तकग्रहण की क्षमताः
(1) कोई भी हिंदू विधवा जो मानसिक रूप से स्वस्थ हो व 18 वर्ष की आयु पूर्ण
कर चुकी हो, अपने पति के लिए पुत्र के दत्तकग्रहण की क्षमता रखती है।
बशर्ते कि-
क. उसके पति स्पष्ट अथवा अन्तनिर्हित रूप से ........... ने उस दत्तकग्रहण को निषिद्ध न किया हो, तथा
ख. उसके दत्तकग्रहण की क्षमता को समाप्त न कर दिया हो।
भाग 6, धारा 5(2), पृष्ठ 24