भाग 3 - दत्तकग्रहण - Page 701

686 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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58. दो या अधिक विधवाओं के मध्य दत्तकग्रहण का अधिकारः जहाँ कोई हिंदू पुरुष अपने पीछे दो या अधिक विधवाओं को उसके लिए दत्तकग्रहण करने के अधिकार के साथ छोड़ दिया गया है वहां उनके बीच इस अधिकार का निर्धारण निम्न प्रावधानों से होगाः

(क) यदि उसने सभी या उनमें से किसी एक को प्राथमिकता का संकेत देते हुए इस आधार

पर ये अधिकार दिया है तो दत्तकग्रहण के अधिकार में उसी क्रम का पालन होगा।

(ख) यदि उसने इस प्रकार का कोई संकेत नहीं दिया है तो धारा 59 के अनुसार

विधवाओं की वरिष्ठता द्वारा क्रम तय होगा कि किसे ये अधिकार दिया जाए_

(ग) यदि उसने न तो किसी को दत्तकग्रहण का अधिकार दिया है न उसका निषेध

किया है तो धारा 59 में निर्धारित नियमों के अनुसार उनकी वरिष्ठता के क्रम में

उनका अधिकार तय होगा।

(घ) यदि कोई विधवा जिसके पास खंड़ ब या स के तहत दत्तक ग्रहण का अधिकार है

वह यदि चाहे तो किसी पंजीकृत प्रपत्र द्वारा अगली वरिष्ठ विधवा को ये अधिकार

दे सकती है। यदि वह ऐसा घोषित नहीं करती और दत्तकग्रहण के लिए बिना

उचित कारण इंकार करती है अथवा इसके लिए अन्य वरिष्ठ अथवा अन्य विध

वा द्वारा आमंत्रित किए जाने पर एक निश्चित समय के भीतर अपने अधिकार का

प्रयोग करने में असफल रहती है तो ये अधिकार उसके बाद की वरिष्ठ विधवा

को चला जाएगा और ये क्रम वरीयतानुसार अंतिम विधवा तक जारी रहेगा।

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59. पत्नियों व विधवाओं के मधय वरिष्ठताः इस भाग के उद्देश्य के लिए - किसी व्यक्ति की पत्नियों एवं विधवाओं के बीच वरिष्ठता का क्रम उसी क्रम से तय होगा जो कि उनके विवाह का क्रम है। जिस महिला का विवाह पहले हुआ है, वह बाद में विवाह होनेवाली महिला से वरिष्ठ मानी जाएगी।

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60. विधवा के गोद लेने का अधिकार पूर्व अभ्यास से निःशेष नहीं होगाः एक विधवा इस भाग के प्रावधान के अधीन उत्तराधिकार के लिए एक की मृत्यु के बाद दूसरा पुत्र गोद ले सकती है। इस तरह वह कई पुत्र गोद ले सकती है जब तक कोई प्राधिकारी यदि कोई हो, तो उस पर उसके पति द्वारा अन्यथा प्रदत्त प्रावधान न लगा दे।