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स्पष्टीकरणः- दत्तक ग्रहण की वैद्यता के लिए ‘दत्ता होमम’ का अनुष्ठान आवश्यक नहीं है।
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दत्तकग्रहण के लिए अन्य शर्तें
66. अन्य शर्तें ः
(1) हर दत्तक ग्रहण में निम्न शतों का अनुपालन अनिवार्य रूप से होना चाहिएः-
( i ) वह पिता जो दत्तक दे रहा है या जिसे दत्तक दिया गया है उन का कोई
हिंदू पुत्र, पौत्र, या प्रपौत्र (चाहे वह वैध रक्त संबंध से हो या दत्तक ग्रहण
से) अनिवार्य रूप से दत्तकग्रहण के समय जीवित न हो।
स्पष्टीकरणः- दत्तक ग्रहण के समय वास्तविक रूप से अजन्मे यद्यपि वह
गर्भ में पनप रहा हो और बाद में जीवित जन्म ले, को इस खंड़ के लिए
जीवित नहीं माना जाएगा।
( ii ) एक ही बालक एक साथ दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा दत्तक नहीं
लिया जा सकता न ही दो या उससे अधिक बालकों को एक-साथ एक ही
व्यक्ति द्वारा दत्तक लिया जा सकता है।
( iii ) प्रत्येक दत्तकग्रहण में देने वाले व ग्रहण करने वाले की मुक्त सहमति होनी
चाहिए।
(2) यदि दत्तक देने वाले व ग्रहण करने वाले की सहमति जोर जबरदस्ती, गैर-जरूरी प्रभाव, धोखा, गलतबयानी या गलती से ली गई हो तो दोनों में से कोई पक्ष दत्तकग्रहण को अवैध घोषित करने के लिए वाद ला सकता हैः-
न्यायालय ऐसे मुकदमे को खारिज कर सकता है बशर्तेः
(क) जोर-जबरदस्ती, गैर-जरूरी प्रभाव, गलतबयानी या गलती पकड़ में आने के
दो वर्ष से अधिक समय के बाद मुकदमा दायर किया गया हो_ अथवा
(ख) यदि जोर-जबरदस्ती, गैर-जरूरी प्रभाव, गलतबयानी या गलती, जैसा भी
मामला हो, के सामने आने के बाद भी सहमति देने वाला दत्तकग्रहण की
पुष्टि करता है, और ऐसी पुष्टि से किसी अन्य के अधिकार पर असर न
पड़ता हो।