(72)
68. दत्तकग्रहण द्वारा संपत्ति को अनिर्निहित करनाः
(1) जहां इस अधिनियम के लागू होने के बाद कोई विधवा दत्तकग्रहण करती है तो वह दत्तक पुत्र -
(क) दत्तक पुत्र होने के नाते वह विधवा व अन्य विधवाएं
यदि कोई हों, को वंशानुगत प्राप्त संपत्ति में आधे का
स्वामी होगा जैसे वह दत्तक पिता के उत्तराधिकारी के
बतौर दत्तकग्रहण से ठीक पहले होता।
(ख) यदि दत्तकग्रहण ग्रहीता पिता के पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र की मृत्यु
के पश्चात् हुआ हो तो आधी संपत्ति ग्रहीता माता और
अन्य विधवाएं यदि कोई हां, जो वे ग्रहिता पिता से प्राप्त
करतीं और इसके अतिरिक्त आधी सम्पत्ति जो उसके पुत्र,
पौत्र, प्रपौत्र का उत्तराधिकारी होने के नाते प्राप्त करतीः
संपति में हिस्सा वैसे ही निश्चित होगा जैसा कि दत्तकग्रहण से ठीक पहले थाः-
बशर्ते कि यदि सारी संपत्ति या उसका एक हिस्सा जो उसे या उन्हें विरासत में किसी परम्परा, रीति-रिवाज अथवा किसी अनुदान या कानून द्वारा अविभाज्य रूप से मिला हो, दत्तक पुत्र उस पूरी जागीर को अविभाज्य ही रहने देगा जैसा कि दत्तकग्रहण से ठीक पहले था इसके साथ ही उसे खंड़ अ या ब के तहत प्राप्त संपत्ति का वह अधिकारी बनाया जा सकता है।
(2) उप-खंड (1) के प्रावधान भारत के प्रांतों में कहीं भी रिक्त कृषि-भूमि पर लागू होंगे।
(73)
697
भाग 6, धारा 19, पृष्ठ 27
69. ग्रहीता माता-पिता को अपनी संपत्तियों के निवर्तन का अधिकारः दत्तक ग्रहण से माता अथवा पिता अपनी संपत्ति को जीवित व्याक्तियों के बीच अंतरण या वसीयत द्वारा निवर्तन के अधिकार से वंचित नहीं होते जब तक कि इसके विपरीत कोई समझौता न किया गया हो।