698 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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70. विधुर द्वारादत्तक ग्रहण के मामले में ग्रहीता माता का निर्धारणः
(1) यदि कोई हिंदू जिसकी एक पत्नी जीवित है, पुत्र गोद लेता है तो वह दत्तक पुत्र की ग्रहीता माता मानी जाएगी। भाग 6, धारा
22, पृष्ठ 27ए (2) जहां हिंदू की एक से ज्यादा पत्नियां जीवित हैं- 28
( i ) वह पत्नी जिसके सहयोग से या जिसकी सहमति से दत्तकग्रहण हुआ है, अथवा
( ii ) यदि एक से ज्यादा पत्नियों का सहयोग या सहमति ली गई है तो विवाह में पत्नियों के मध्य वरीष्ठतम पत्नी को जिसका सहयोग या सहमति ली गई है। दत्तक पुत्र की ग्रहीता माता व अन्य पत्नियों को उसकी सौतेली माएं माना जाएगा।
(3) यदि कोई विधुर अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद किसी समय दत्तकग्रहण करता है तो दत्तकग्रहण से ठीक पहले जिस पत्नी की मृत्यु हुई है उसे ग्रहीता माता माना जाएगा व अन्य मृत पत्नी जो ग्रहीता माता नहीं या बाद में विवाह किए जाने वाली पत्नी उसकी सौतेली माँएं मानी जाएंगी दत्तक पुत्र की, जब तक कि ग्रहीता पिता ने कोई निर्देश या साफ संकेत न दिया हो कि इन पत्नियों में से कोई अन्य उसकी ग्रहीता माता होगी। ऐसे मामले में कोई पूर्व मृत पत्नी जो दत्तक माता नहीं है और कोई पत्नी जिससे बाद में ग्रहीता पिता ने विवाह किया है गोद लिए गए पुत्र की सौतेली मांएं मानी जाएंगी।
भाग 6, धारा 22 (3), पृष्ठ 38
(4) जहां किसी अविवाहित ने दत्तकग्रहण किया है बाद में वह जिस से विवाह करेगा
वह दत्तक पुत्र की सौतेली मां मानी जाएगी।
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69. ग्रहीता माता पिता को अपनी संपत्तियों के निवर्तन का अधिकारः दत्तक ग्रहण से माता अथवापिता अपनी संपत्ति को जीवित व्याक्तियों के बीच अंतरण या वसीयत द्वारा निवर्तन के अधिकार से वंचित नहीं होते जब तक कि इसके विपरीत कोई समझौता न किया गया हो।
भाग 6, धारा 21(2), पृष्ठ 27