भाग 3 - दत्तकग्रहण - Page 714

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70. विधुर द्वारा दत्तक ग्रहण के मामले में ग्रहीता माता का निर्धरणः

(1) यदि कोई हिंदू जिसकी एक पत्नी जीवित है, पुत्र गोद लेता

है तो वह दत्तक पुत्र की ग्रहीता माता मानी जाएगी। भाग 6, धारा (2) जहां एक हिंदू की एक से ज्यादा पत्नियां जीवित हैं- 22, पृष्ठ 27, 28

( i ) वह पत्नी जिसके सहयोग से या जिसकी सहमति से

दत्तक ग्रहण हुआ है, अथवा

( ii ) यदि एक से ज्यादा पत्नियों की सहयोग या सहमति ली

गई है तो विवाह में पत्नियों के मध्य वरीष्ठतम पत्नी

को दत्तक पुत्र की ग्रहीता माता व अन्य पत्नियों को

उसकी सौतेली माँएं माना जाएगा।

(3) यदि कोई विधुर अपनी पत्नी की मृत्यु के बाद किसी समय

दत्तक ग्रहण करता है तो दत्तक ग्रहण से ठीक पहले जिस

पत्नी की मृत्यु हुई है उसे ग्रहीता माता माना जाएगा व अन्य

मृत पत्नी जो ग्रहीता माता नहीं है या बाद में विवाह किए

जाने वाली पत्नी उसी सौतेली माँएं मानी जाएंगी दत्तक पुत्र

की, जब तक कि ग्रहीता पिता ने कोई निर्देश या साफ संकेत

न दिया हो कि इन पत्नियों में से कोई अन्य उसकी ग्रहीता

माता होगी। ऐसे मामले में पूर्व मृत पत्नी जो ग्रहीता माता

नहीं है व वह पत्नी जिससे बाद में पिता ने विवाह किया है भाग 6, धारा

गोद लिए गए पुत्र की सौतेली माँएं मानी जाएंगी। 23(3), पृष्ठ (4) जहां किसी अविवाहित ने दत्तकग्रहण किया है बाद में वह 38

जिस से विवाह करेगा वह दत्तक पुत्र की सौतेली मां मानी

जाएगी।

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71. विधवा द्वारादत्तक ग्रहण किए जाने पर ग्रहीता माता का निर्धारणः

(1) जहां मृत हिंदू की कई विधवाओं में से कोई एक दत्तकग्रहण करती है उसे ग्रहीता

माता माना जाएगा व अन्य विधवाएं दत्तक पुत्र की सौतेली माँएं होगी।