भाग 3 - दत्तकग्रहण - Page 720

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भाग 4
अवयस्कता एवं संरक्षण

77. परिभाषाः इस भाग में -

(1) ‘‘अवयस्क‘‘ से अभिप्राय उस व्यक्ति से है जिसने अठारह वर्ष की आयु पूरी न की हो_

(2 ‘‘प्राकृतिक संरक्षक‘‘ से अभिप्राय धारा 78 में दिए गए संरक्षकों से है लेकिन इनमें ये संरक्षक शामिल नहीं है-

( i ) अवस्क के पिता की इच्छा से नियुक्त किए गए संरक्षक,

अथवा

( ii ) न्यायालय द्वारा नियुक्त या घोषित, अथवा

( iii ) कोर्ट ऑफ वार्ड से संबंधित किसी अधिनियम के द्व

ारा या उसके तत्वाधन में अधिकार प्राप्त व्यक्ति।

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भाग 5, धारा 1, पृष्ठ 22

78. एक हिंदू अवयस्क के स्वाभाविक संरक्षकः एक हिंदू अवयस्क की शारीरिक सुरक्षा व संपत्ति की सुरक्षा के लिए उसके स्वाभाविक संरक्षक होंगेः-

(1) एक लड़के या अविवाहित लड़की के संबंध में - पिता, व

उसके बाद माताः बशर्ते यदि अवयस्क ने तीन साल की आयु पूरी नहीं की है तो वह माता के देखभाल में रहेगी_

(2) एक जारज लड़का या अविवाहित जारज लड़की के संबंध में-माता व उसके बाद पिता_

(3 विवाहित कन्या के संबंध में -उसका पति

भाग 5, धारा 4, पृष्ठ 22

परंतु कोई भी व्यक्ति इस धारा के तहत अवयस्क के प्राकृतिक संरक्षक की भूमिका नहीं निभा सकता यदि,

(1) यदि वह हिंदू न रहा हो_ अथवा

(2) उसने धारा 110 की उपधारा 1. के तहत पूर्णतया व अंतिम रूप से संसार का परित्याग कर दिया हो।