(81)
भाग 4
अवयस्कता एवं संरक्षण
77. परिभाषाः इस भाग में -
(1) ‘‘अवयस्क‘‘ से अभिप्राय उस व्यक्ति से है जिसने अठारह वर्ष की आयु पूरी न की हो_
(2 ‘‘प्राकृतिक संरक्षक‘‘ से अभिप्राय धारा 78 में दिए गए संरक्षकों से है लेकिन इनमें ये संरक्षक शामिल नहीं है-
( i ) अवस्क के पिता की इच्छा से नियुक्त किए गए संरक्षक,
अथवा
( ii ) न्यायालय द्वारा नियुक्त या घोषित, अथवा
( iii ) कोर्ट ऑफ वार्ड से संबंधित किसी अधिनियम के द्व
ारा या उसके तत्वाधन में अधिकार प्राप्त व्यक्ति।
(82)
705
भाग 5, धारा 1, पृष्ठ 22
78. एक हिंदू अवयस्क के स्वाभाविक संरक्षकः एक हिंदू अवयस्क की शारीरिक सुरक्षा व संपत्ति की सुरक्षा के लिए उसके स्वाभाविक संरक्षक होंगेः-
(1) एक लड़के या अविवाहित लड़की के संबंध में - पिता, व
उसके बाद माताः बशर्ते यदि अवयस्क ने तीन साल की आयु पूरी नहीं की है तो वह माता के देखभाल में रहेगी_
(2) एक जारज लड़का या अविवाहित जारज लड़की के संबंध में-माता व उसके बाद पिता_
(3 विवाहित कन्या के संबंध में -उसका पति
भाग 5, धारा 4, पृष्ठ 22
परंतु कोई भी व्यक्ति इस धारा के तहत अवयस्क के प्राकृतिक संरक्षक की भूमिका नहीं निभा सकता यदि,
(1) यदि वह हिंदू न रहा हो_ अथवा
(2) उसने धारा 110 की उपधारा 1. के तहत पूर्णतया व अंतिम रूप से संसार का परित्याग कर दिया हो।