706 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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79. दत्तक पुत्र की स्वाभाविक संरक्षताः दत्तक पुत्र जो अवयस्क है की स्वाभाविक संरक्षता गोद लेने के बाद उसके जन्म के परिवार से गोद लेने वाले परिवार में आ जाती है।
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80. स्वाभाविक संरक्षक की शक्तियांः
भाग 5, धारा 5, पृष्ठ 22
(1) इस धारा के प्रावधान के अधीन एक हिंदू अवयस्क के स्वाभाविक संरक्षक को वे सभी कार्य करने का अधिकार है जो अवयस्क के लाभ अथवा उसकी संपत्ति की प्राप्ति, सुरक्षा या लाभ के लिए आवश्यक अथवा उचित व सही हो। किंतु किसी भी मामले में संरक्षक अवयस्क को व्यक्तिगत इकरारनामे में नहीं बांध सकता।
(2) न्यायालय की पूर्व आज्ञा के बिना प्राकृतिक संरक्षक नहीं कर सकता-
(क) अवयस्क की अचल संपत्ति के किसी भाग को बंधक या शुल्क, या बिक्री,
उपहार, अदल-बदल या किसी अन्य तरीके से हस्तांतरित या_
(ख) ऐसी संपत्ति के किसी भाग को पांच वर्ष से ज्यादा समय या अवयस्क के
वयस्क होने की तिथि के एक साल से ज्यादा समय के लिए पट्टे पर नहीं
दे सकता।
(3) प्राकृतिक संरक्षक द्वारा उप-धारा (1) अथवा (2) के उल्लंघन के
फलस्वरूप अचल संपत्ति के लिए की गई कोई व्यवस्था शून्य हो जाएगी यदि उससे अवयस्क या अन्य कोई प्रभावित होता हो।
(4) उप-धारा (2) में कहे किसी कार्य के लिए न्यायालय प्राकृतिक संरक्षक को आज्ञा नहीं दे सकता बशर्ते वह आवश्यक हो या अवयस्क की भलाई के लिए हो।
भाग 5, धारा 6, पृष्ठ 23
(5) उप-धारा (2) के तहत न्यायालय से आज्ञा के लिए दी गई अर्जी के संबंध में द गार्जियंस एंड वार्ड एक्ट, 1890 (1890 का VIII ) लागू होगा, और इस संबंध में आज्ञा के लिए दी गई अर्जी ऐसे मानी जाएगी जैसे वह उस एक्ट की धारा 29के तहत है, विशेषतः-
(क) आवेदन के संबंध में सुनवाई को उस अधिनियम की धारा 4अ के अर्थ के
दायरे में समझा जाएगा_