भाग 3 - दत्तकग्रहण - Page 724

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82. वसीयती संरक्षक व उसके अधिकारः

(1) एक हिंदू पिता, अपनी इच्छा से अपने वैध अवयस्क बच्चे के लिए उसके शरीर अथवा संपत्ति, या दोनों के लिए संरक्षक की नियुक्ति कर सकता हैः

परंतु यदि माता जीवित हो और अपने अवयस्क बच्चे के संरक्षक की भूमिका निभा सकती हो तो यह धारा किसी अन्य को अधिकृत करने का अधिकार नहीं देती।

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भाग 5, धारा 8, पृष्ठ 23

(2) इस भाग के तहत संरक्षक जिसे नियुक्त किया गया है, को पिता की मृत्यु के बाद अवयस्क के संरक्षक की भूमिका निभाने व वे सभी कार्य करने जो वसीयत में दी गई सीमा व यदि कोई प्रतिबंध हों तो उनका पालन करते हुए, करने का अधिकार है।

(3) इस भाग के प्रावधानो के अनुसार, एक हिंदू विधवा, अपनी इच्छा से अपने किसी अवयस्क बच्चे के दैहिक संरक्षण के लिए किसी व्यक्ति को नियुक्त कर सकती हैंः

बशर्तें यदि उसके पति ने किसी व्यक्ति को ऐसे बच्चे के दैहिक संरक्षण के लिए नियुक्ति पहले ही न कर रखा हो।

(4) अवयस्क लड़की नियुक्त संरक्षक का अधिकार उसके विवाह के बाद समाप्त हो जाएगा।

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83. धार्मिक पालन-पोषण के लिए संरक्षक की जिम्मेदारी ः यह एक हिंदू अवयस्क के संरक्षक की जिम्मेदारी है कि वह अवयस्क का पालन-पोषण अवयस्क के पिता के धर्म के अनुसार करे।

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84. वास्तविक संरक्षक अवयस्क की संपत्ति के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता ः इस संहिता के लागू होने के बाद कोई भी व्यक्ति इस आधर पर कि वह अवयस्क का वास्तविक संरक्षक है, उसकी संपत्ति से छेड़छाड़ करने या उसके विषय में कोई निर्णय नहीं कर सकेगा।

भाग 5, धारा 9, पृष्ठ 23

भाग 5, धारा 10, पृष्ठ 23