710 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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81. प्राकृतिक संरक्षक द्वारा अधिकार का निरसनः जहां किसी हिंदू अवयस्क का प्राकृतिक संरक्षक किसी अन्य व्यक्ति को अवयस्क का अधिकार सौंपता है, तो ये रद्द करने योग्य है सिवाय वहां -
(अ) जहां इस तरह रद्द करने की आज्ञा अवयस्क के हित में न
हो_ अथवा
(ब) जहां प्राकृतिक संरक्षक िंहंदू न रहा हो_ अथवा
(स) जहां किन्हीं अन्य पर्याप्त कारणों से इस तरह की आज्ञा देना
अवयस्क के लिए वांछनीय न हों।
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82. वसीयती संरक्षक व उसके अधिकारः
(1) एक हिंदू पिता, अपनी इच्छा से अपने वैध अवयस्क बच्चे के
लिए उसके शरीर अथवा संपत्ति, या दोनों के लिए संरक्षक
की नियुक्ति कर सकता है।
परंतु यदि माता जीवित हो और अपने अवयस्क बच्चे के
संरक्षक की भूमिका निभा सकती हो तो यह धारा किसी
अन्य को अधिकृत करने का अधिकार नहीं देता।
(2) इस भाग के तहत संरक्षक जिसे नियुक्त किया गया है, को
पिता की मृत्यु के बाद अवयस्क के संरक्षक की भूमिका
निभाने व वे सभी कार्य करने जो वसीयत में दी गई सीमा
व यदि कोई प्रतिबंध हों तो उनका पालन करते हुए, करने
का अधिकार है।
(3) इस भाग के प्रावधानो के अनुसार, एक हिंदू विधवा, अपनी
इच्छा से अपने किसी अवयस्क बच्चे के दैहिक संरक्षण के
लिए किसी व्यक्ति को नियुक्त कर सकती हैं बशर्ते_
यदि उसके पति ने किसी व्यक्ति को ऐसे बच्चे के दैहिक
संरक्षण के लिए नियुक्ति पहले ही न कर रखी हो।
(4) अवयस्क लड़की नियुक्त संरक्षक का अधिकार उसके विवाह
के बाद समाप्त हो जाएगा।
भाग 5, धारा 7, पृष्ठ 23
भाग 5, धारा 8, पृष्ठ 23