भाग 3 - दत्तकग्रहण - Page 727

712 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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भाग 5µसंयुक्त परिवार व सहदायिकी
अध्याय 1
सामान्य सिद्धांत

86. जन्म और उत्तरजीविता के अधिकार का सामान्यतः निरसनः इस संहिता के लागू होने के बाद इस भाग के मामलों व इस भाग के प्रावधान में स्पष्ट रूप से उल्लिखित सीमा को छोड़कर किसी हिंदू को न कोई अधिकार प्राप्त होगा और न वह रूचि रखेगा-

(क) किसी पूर्वज की संपत्ति में, अपने जीवनकाल में केवल इस कारण कि वह उस

पूर्वज के परिवार में जन्मा है_ अथवा

(ख) संयुक्त परिवार की किसी संपत्ति में जो उत्तरजीविता के नियम पर आधरित है।

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87. संयुक्त अभिवृति को सामान्यतः साझा अभिवृत्ति से बदला जानाः इस संहिता के लागू होने के बाद इस भाग में उल्लेखित मामलों व स्पष्ट रूप उल्लिखित सीमा के अतिरिक्त संयुक्त परिवार के सभी सदस्य जिस संपत्ति को संयुक्त रूप से धारण करते हैं उसे साझा अभिवृत्ति माना जाए जैसे यदि उस संपत्ति का विभाजन हुआ होता तो प्रत्येक स्त्री या पुरुष अपने हिस्से की संपत्ति को इस प्रकार लेते मानों वह उसके पूर्णतया मालिक हैः

परंतु इस धारा में उल्लिखित कोई नियम संयुक्त परिवार के किसी सदस्य, यदि कोई हो तो, के भरण-पोषण व रिहायशी के अधिकार को प्रभावित नहीं करेगा, उन व्यक्तियों के अलावा जो अपना भाग स्वतंत्र रूप से रखने के पात्र हैं तथा ऐसा अधिकार उसी तरह प्रभावी होगा जैसा तब होता यदि ये संहिता लागू न हुई होती।