संयुक्त परिवार की संपत्ति - Page 731

716 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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88. धर्मिक कर्तव्य के नियम का निरसनः इस संहिता के लागू होने के बाद कोई न्यायालय उप-धारा (2) में मान्य किसी पुत्र, पौत्र या प्रपौत्र से किसी ऋण की वसूली के विरुद्ध, जो पिता, दादा या परदादा द्वारा देय है, अथवा ऐसे किसी ऋण की अदायगी के संबंध में कार्रवाई करने या इस संबंध में संपत्ति के हस्तांतरण अथवा ऐसे किसी ऋण की संतुष्टि के लिए उस पुत्र, पौत्र या प्रपौत्र के धर्मिक कर्तव्यों के आधर पर बचने का अधिकार नहीं देता।

(2) ऐसे किसी ऋण के संबंध में जो इस संहिता के प्रभाव में आने से पूर्व लिया गया

है, उप-धारा (2) में उल्लिखित कुछ भी प्रभावी नहीं होगाः

(क) ऐसे किसी पुत्र, पौत्र या प्रपौत्र के विरुद्ध किसी ऋण दाता द्वारा कार्रवाई

करने का अधिकार, अथवा

(ख) ऐसे किसी ऋण के संबंध में, या उसकी संतुष्टि के लिए किया गया

हस्तांतरण,

और ऐसा कोई अधिकार अथवा हस्तांतरण धर्मिक कर्तव्य के तहत उसी तरह व उसी सीमा तक लागू होगा जैसा तब होता यदि ये संहिता प्रभाव में न आई होती।

स्पष्टीकरणः- उप-धारा (2) के उद्देश्य के लिए प्रयुक्त फ्पुत्र, पौत्र या प्रपौत्रय् का अभिप्राय उस पुत्र, पौत्र या प्रपौत्र से है जो इस संहिता के प्रभावी होने से पूर्व पैदा हुआ है या गोद लिया गया है।

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89. इस संहिता के प्रभाव में आने से पूर्व लिए ऋणों के प्रति संयुक्त परिवार की जिम्मेदारी ः वहां जहां इस संहिता के लागू होने से पूर्व कोई ऋण संयुक्त परिवार के प्रबंधक अथवा कर्ता द्वारा परिवार के हित के उद्देश्य से अनुबंधित किया गया है, इस अधिनियम मे उल्लिखित प्रावधान ऐसे किसी ऋण को चुकाने की जिम्मेदारी को प्रभावित नहीं करता तथा ऐसी जिम्मेदारी संयुक्त रूप से सभी की अथवा किसी एक की जो उसके लिए जिम्मेदार है, उसी तरह व उसी सीमा तक होती है, जो यदि ये संहिता प्रभाव में न होती, तब होती।