संयुक्त परिवार की संपत्ति - Page 732

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पाठ 2
मिताक्षरा सहदायिकी

90. अध्याय का लागू होनाः ये अध्याय उन हिंदुओं पर लागू होता है जो यदि ये संहिता प्रभाव में न आई होती तो मिताक्षरा शाखा की हिंदू विधि से संचालित होते।

90क. परिभाषाः इस अधयाय में-

फ्पैतृक संपत्तिय् से अभिप्राय ऐसी कोई संपत्ति जो किसी हिंदू पुरुष को विरासत में उसके पिता, दादा अथवा पड़दादा से प्राप्त हुई हो, तथा इसमें शामिल है- (क) किसी पैतृक पूर्वज की संपत्ति में से विभाजन पर मिला भाग,

(ख) पैतृक संपत्ति में कोई अभिवृद्धि_

किंतु इसमें ये शामिल नहीं हैं-

( i ) हिंदू ज्ञानार्जन लाभ अधिनियम, 1930 (1930 का XXX ) के अनुसार उसके

द्वारा ज्ञानार्जन से प्राप्त लाभ_

( ii ) कोई संपत्ति जो उसके द्वारा विरासत के अतिरिक्त किसी अन्य प्रकार से प्राप्त

की गई हो_

( iii ) पैतृक संपत्ति के नियमानुसार उसके पितृ पक्ष के तुरंत पहले के तीन पूर्वजों

के अतिरिक्त किसी अन्य द्वारा प्राप्त संपत्ति_

( iv ) उसके अधिकार में कोई अन्य पृथक संपत्ति_

तथापि ऐसी कोई या सभी संपत्ति कुछ समय के लिए संयुक्त या सहदायिक संपत्ति के रूप में हो सकती है।

स्पष्टीकरणः पैतृक संपत्ति में अभिवृद्धि में उस संपत्ति से प्राप्त आय, उस आय से

खरीदी या अधिगृहित संपत्ति अथवा ऐसी संपत्ति की सहायता से प्राप्त पैदावार या उस पैदावार को बेचने से प्राप्त आय और उस आय से खरीदी कोई संपत्ति आती है।

90ख. सहदायिकीः

(1) एक व्यक्ति एक सहदायक बनता है, यदि निम्न स्थितियां संतुष्ट होती हैं, यथा-

( i ) कि वह,