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में ऐसी कोई आवश्यकता नहीं है, इसमें कोई दबाव नहीं है परन्तु इसमें एक विकल्प है। विकल्प हमेशा होते हैं। पीने वालों के लिए विकल्प है कि वे शराब की दुकान पर जाएं अथवा न जाएं। इसमें हमेशा वाला विकल्प है, परन्तु वे सदैव जाते हैं जब शराब की कोई दुकान होती है तो क्या शराब की दुकान को कानून द्वारा बन्द कर दिया जाना चाहिए? यदि इसी बात को समाज के किसी भाग पर लागू किया जाता है, तो मैं इसका स्वागत करूँगा। विवाह के कानून में एक पत्नीत्व होना चाहिए, मैं इस बात को स्वीकार करता हूँ। मैं इससे भी आगे जाना चाहता हूँ और यह कहता हूँ यदि आप यह विचार करें कि संयम के दृष्टिकोण से दूसरा विवाह नहीं होना चाहिए चाहे वे महिलाएं हों अथवा पुरुष हों तो यह व्यवस्था भी स्वागत योग्य है। परन्तु इसके अलावा हम दूसरे छोर की बात करना चाहते हैं और इस बात की व्यवस्था करना चाहते हैं कि प्रत्येक विवाह, यदि ऐसी इच्छा हो जाए, विघटन किये जाने योग्य होना चाहिए। मेरे विचार से यह बांछनीय नहीं हैं। इसमें संदेह नहीं कि तलाक की प्रथा किसी समय प्राचीन हिंदुओं में थी। बाद में इसका विरोध हो गया चाहे इसके ऐतिहासिक कारण प्रारम्भ में कुछ भी रहे हों। मुझे इसका कारण यह लगता है कि परिवार की एकता को बनाए रखना था। वे चाहते थे कि यदि एक बार विवाह हो गया है तो उसका विघटन नहीं किया जाना चाहिए ताकि किसी पुरुष के जीवन में अन्य कोई महिला प्रवेश नहीं कर पाये और वह महिला जो परिवार में थी, अलग नहीं हो पाए और उसके स्थान पर दूसरी महिला नहीं आ पाए। जहां तक संभव हो इस संभावित घटना को टाला जाए। मेरे विचार से यह एक कारण था कि विवाह विघटन की अनुमति नहीं दी गई। इसलिए मेरा सुझाव यह है विवाह के अध्याय में दो भाग हों। ऐसे लोग जो यह चाहते हैं कि उनका विवाह-विघटन होना चाहिए, वे सिविल विवाह करें और जो कानून बना रहे हैं, उसके उपबंधों के अनुसार उन्हें स्वतंत्रता से विवाह-विघटन की अनुमति हो। दूसरे भाग में जो सांस्कारिक विवाह का भाग हो सकता है, इसमें विवाह विघटन न हो। मेरे विचार से यह दोनों पक्षों को संतुष्ट करता है। मेरा नम्र निवेदन है कि संबंध-विच्छेद को क्यों दबाव बनाया जाए?
श्री महावीर त्यागीः ऐसी स्थिति में उन्हें, विवाह से पूर्व संबंध-विच्छेद के बारे में निर्णय करना होगा।
श्री वी.एस. सरवतेः मेरा विश्वास है कि मेरे माननीय मित्र ने मुझे बिल्कुल गलत समझा है। मैं यह कहना चाहता हूँ कि वे पुरुष और महिलाएं जो यह चाहते हैं कि उनके विवाह-विघटन न हों, सांस्कारिक अधिकारों के साथ विवाह और वे जो चाहते हैं कि भविष्य में उनका विवाह-विच्छेद हो सकता है, वे सिविल विवाह प्रणाली के अनुसार विवाह करें।
श्री तजामुल हुसेनः क्या मेरे माननीय मित्र का अभिप्राय यह है कि विवाह से पूर्व ही तलाक निश्चित हो जाए?