संयुक्त परिवार की संपत्ति - Page 740

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भाग 6
स्त्री की संपत्ति

91. स्त्री संपत्ति की प्रकृतिः

(1) इस संहिता के लागू होने के बाद किसी स्त्री द्वारा अधिकृत संपत्ति पूर्णतया उसकी संपत्ति होगी।

(2) उप-धारा (1) में उल्लेखित प्रावधान स्त्री द्वारा उपार्जित संपत्ति पर लागू नहीं होंगे चाहे वह उसे उपहार में प्राप्त हुई हो, या किसी वसीयत के तहत जहां उपहार वसीयत जिसमें स्पष्ट रूप से अथवा जरूरी शर्तों के साथ, ऐसी संपत्ति में एक प्रतिबंधित जागीर नियत करती हैः

परंतु ऐसी कोई शर्तें केवल स्त्री जाति होने के कारण नहीं लगाई जाएगी।

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भाग 2, धारा 13, पृष्ठ 9

स्पष्टीकरण ः- इस धारा में ‘‘संपत्तिय् में चल व अचल दोनों तरह की संपत्ति, जो किसी स्त्री द्वारा उपार्जित की गई है, शामिल हैं। चाहे वह संपत्ति उसे विवाह से पूर्व मिली हो, विवाह पर या विवाह के बाद, अथवा विधवा होने पर मिली हो। और चाहे विरासत में मिली हो या साधन रूप में, अथवा बंटवारे में हो अथवा भरण-पोषण के एवज में या उसके बकाये के रूप में प्राप्त हुई हो, अथवा किसी व्यक्ति द्वारा, चाहे वह रिश्तेदार हो अथवा नहीं उपहार में प्राप्त हुई हो अथवा अपने कौशल या श्रम से मिली हो या खरीदी हो, किसी नुस्खे से या अन्य कोई तरीका जो भी हो द्वारा मिली हो।

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92. स्त्री संपत्ति के दायित्व का हस्तांतरणः

(1) जहां इस संहिता के लागू होने के बाद किसी स्त्री की मृत्यु

होती है तो उसके द्वारा उपार्जित संपत्ति चाहे वह इस संहिता के प्रभावी होने से पहले अर्जित की गई हो या बाद में, यदि वह पैतृक संपत्ति है तो भाग 7 में बताए तरीके द्वारा उसके उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित हो जाएगी।

भाग 2, धारा 3, पृष्ठ 3