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की मृत्यु के समय जीवित हो छोड़ कर नहीं गया है
तो ऐसे पूर्व मृतक पुत्र का भाग उसकी विधवा और
उसके पुत्र की विधवा या विधवाओं में इस तरह बंटेगा
कि उस विधवा का हिस्सा उसके पुत्रों की विधवाओं
से दुगुना होगा।
(3) इस धारा के उद्देश्य के लिए कोई व्यक्ति जो एक से अधिक
विधवा छोड़ गया है तो एक विधवा को मिलने वाला हिस्सा
सभी विधवाओं में बराबर बांटा जाएगा।
उदाहरण
i . किसी निर्वसीयती के उत्तराधिकारी तीन पृत्र हैं, क, ख, ग, पूर्व मृत पुत्र घ के पांच
पौत्र हैं और दो पर-पौत्र हैं, दूसरे पूर्व मृत पुत्र के पूर्व मृत पुत्र ड. से। क, ख, ग
प्रत्येक के एक हिस्सा लेने और घ तथा ड. की शाखाएं प्रत्येक एक हिस्सा लेते है।
घ की शाखा के पोत्र व ड. की शाखा के प्रपोत्र उनकी शाखाओं को मिले हिस्से
को बराबर बांटते हैं निर्वसीयती का प्रत्येक पुत्र इस प्रकार विरासत की संपत्ति का
पांच वां हिसा लेता है, प्रत्येक पौत्र बीसवां हिसा और प्रत्येक परपौत्र दसवां हिस्सा।
ii . निर्वसीयती का केवल एक पुत्री अथवा विधवा पीछे बची हों तो सारी पैतृक संपत्ति
उन्हें मिलेगी।
iii . निर्वसीयती के जीवित उत्तराधिकारी विधवा तथा पूर्व मृतक पुत्र से दो पोत्र हैं तो
एक भाग विधवा को व अन्य एक भाग दोनों पोत्रों को बराबर बंटेगा। यानी विधवा
को पैतृक संपत्ति का आधा व पौत्रों को चौथाई हिस्सा मिलेगा।
iv . यदि उत्तरजीवी एक पुत्री व एक पूर्वमृतक पुत्र की विधवा है तो पुत्री को एक व
विधवा को आधा भाग मिलेगा।
v . जहां उत्तरजीवी एक पुत्र, एक पुत्री व एक पूर्वमृतक की विधवा है तो, पुत्र व
पुत्री को एक-एक भाग व विधवा को आधा भाग मिलेगा।
vi . उत्तरजीवी एक पुत्र, एक पुत्री, पूर्वमृतक पुत्र की विधवा व एक पुत्र है। पुत्र व
पुत्री को एक एक भाग व विधवा व उसके पुत्र को एक भाग संयुक्त रूप से
मिलेगा जिसे दोनों में बराबर भागों में बांटा जाएगा।
vii . उत्तरजीवी उत्तराधिकारी हैं-
(क) विधवा
(ख) पुत्र,