(116)
103. बंधु जो उत्तराधिकारी हैंः आठवीं अनुसूची के वर्ग 1 व 2 में दिए किसी प्राथमिक उत्तराधिकारी या गोत्रज के अभाव में मृतक के वह बंधु जो उससे पांच कोटी तक संबंधित हैं, इस भाग में तय नियमों के अनुसार उत्तराधिकार के अधिकारी है।
(117)
104. गोत्रज व बंधुओं के बीच उत्तराधिकार का क्रमः गोत्रज या बंधु जैसा भी मामला हो, के बीच उत्तराधिकार का क्रम निम्न प्राथमिकता के नियमों के अनुसार निर्धरित किया जाएगा-
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भाग 1, धारा 8, पृष्ठ 7
भाग 2, धारा 9, पृष्ठ 7 और 8
नियम 1- दो उत्तराधिकारियों में उसे जिसके पास चढ़ते क्रम की कम या कोई कोटी नहीं है, को प्राथमिकता दी जाएगी,
नियम 2- जहां उपरी क्रम की कोटी की संख्या समान हो या न हों प्राथमिकता उसे मिलेगी जिसके पास बढ़ते क्रम की कम या कोई कोटी न हो।
नियम 3- जहां उतरते क्रम की कोटियों की संख्या समान हो अथवा न हो तब, उत्तराधिकारी जो पुरुष वंश क्रम के हैं, को स्त्री वंशक्रम की बजाय प्राथमिकता दी जाएगी, प्रथमदृष्टया निर्वसीयती से उत्तराधिकारी तक गिना जाने पर उत्तराधिकारियों में अलगाव न किया जा सके।
नियम 4- जहां दो रेखाओं में फर्क न किया जा सके तो स्त्री उत्तराधिकारियों पर पुरुष उत्तराधिकारियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
नियम 5- जहां इन नियमों के तहत किसी उत्तराधिकारी को प्राथमिकता प्राप्त न हो तो सभी को समान माना जाएगा।
उदाहरण
इस उदाहरण में निर्वसीयती के समान पूर्वज के उपरी क्रम में पिता के लिए पि व माता के लिए माँ का प्रयोग किया गया है और निचले क्रम मे निर्वसीयती के समान उत्तराधिकार क्रम में पु. व क. का प्रयोग पुत्र और कन्या के लिए क्रमशः किया गया है। यथा मापिपुपु निर्वसीयती की माता के पिता के पुत्र का पुत्र यानी माता के भाई का पुत्र है तथा पि क पु पिता की कन्या के पुत्र के लिए प्रयोग किया गया है। (बहन का पुत्र)