756 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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109ख. नंबूदारी स्त्री के निर्वसीयती मरने पर उत्तराधिकार के नियमः इस अध्याय में किए प्रावधान के बावजूद एक हिंदू स्त्री की पृथक या स्वयं अर्जित संपत्ति जो यदि ये संहिता प्रभावी न हुई होती तो नंबूदारी कानून से संचालित होती तो ऐसी संपत्ति के विषय में निर्वसीयती मरने पर उसका हस्तांतरण निम्न नियमों के तहत व उसी क्रम से होगा, यथा-
(क) जहां निर्वसीयती अपने पीछे किसी पारंपरिक वंशज या वंशजों को छोड़ गया है तो
सारी संपत्ति ऐसे वंशज या वंशजों को धारा 105घ की उप-धारा (क) से (घ)
में उल्लेखित नियमों के अनुसार हस्तांतरित हो जाएगी_
(ख) किसी पारंपरिक वंशज की अनुपस्थिति में सारी संपत्ति उसके पति को हस्तांतरित
हो जाएगी_
(ग) उसके पति की अनुपस्थिति में सारी संपत्ति का हस्तांतरण धारा 109 में उल्लेखित
नियमों के अनुसार व उसी क्रम में होगा।
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एक साधु की संपत्ति का हस्तांतरण
110. साधु आदि के लिए नियमः
(1) जहां कोई व्यक्ति पूरी तरह और अंतिम रूप से एक साधु, अथवा संन्यासी अथवा
स्थायी रूप से किसी धर्मिक गुरू का शिष्य बन जाता है तो उसकी संपत्ति उसी
क्रम व नियमों के अनुसार उसके उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित होगी जो तब होती
यदि वह ऐसे परित्याग से पूर्व निर्वसीयती मर जाता_
(2) यदि संपत्ति का अर्जन ऐसे परित्याग के पश्चात् किया गया है तो संपत्ति उसके
संबंधियों को नहीं बल्कि निम्न प्रकार से हस्तांतरित होगीः-
(क) संन्यासी के संबंध में उसी आश्रम के उसके एक आत्मीय धार्मिक बंधु को _
(ख) किसी साधु के संबंध में किसी रीति-रिवाज अथवा परम्परा, जैसा भी मामला
हो, उसके उत्तम शिष्य को_ तथा
(ग) अविरल रूप से एक धार्मिक शिष्य के संबंध में उसके गुरू को।
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