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एक साधु की संपत्ति का हस्तांतरण
110. साधु आदि के लिए नियमः
(1) जहां कोई व्यक्ति पूरी तरह व अंतिम रूप से एक साधु, अथवा संन्यासी अथवा स्थायी रूप से किसी धर्मिक गुरू का शिष्य बन जाता है तो उसकी संपत्ति उसी क्रम व नियमों के अनुसार उसके उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित होगी जो तब होती यदि वह ऐसे परित्याग से पूर्व निर्वसीयती मर जाता_
(2) यदि संपत्ति का अर्जन ऐसे परित्याग के पश्चात् किया गया है तो संपत्ति उसके संबंधियों को नहीं बल्कि निम्न प्रकार से हस्तांतरित होगीः-
(क) संन्यासी के संबंध में उसी आश्रय के उसके एक
आत्मीय धार्मिक बंधु को_
(ख) किसी साधु के संबंध में किसी रिवाज अथवा उपयोग,
जैसा भी मामला हो, उसके उत्तम शिष्य को_ तथा
(ग) अविरल रूप से एक धार्मिक शिष्य के संबंध में, उसके
गुरू को।
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भाग 1, धारा 2, पृष्ठ 9