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उत्तराधिकार से संबंधित सामान्य सिद्धांत
111. सगे संबंधी को सौतेले संबंधी से ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगीः निर्वसीयती संपत्ति के उत्तराधिकार के संबंध में सगे संबंधियों को सौतेले संबंधियों की बनिस्पत ज्यादा अहमियत दी जाएगी, यदि अन्य मामलों में संबंधें की प्रकृति समान रहती है।
उदाहरण
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भाग 2, धारा 15, पृष्ठ 10
- सगे भाई को सौतेले भाई के मुकाबले प्राथमिकता दी जाएगी_ लेकिन सौतेले भाई
को सगे भाई के पुत्र के मुकाबले प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि भाई-भाई के
पुत्र के मुकाबले ज्यादा करीबी उत्तराधिकारी माना जाता है।
- सौतेले चाचा को सगे चाचा के पुत्र के मुकाबले प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि
चाचा चाचा के पुत्र के मुकाबले करीबी उत्तराधिकारी माना जाता है।
- सगे भाई की पुत्री को सौतेले भाई की पुत्री की पुत्री के मुकाबले प्राथमिकता दी जाएगी
लेकिन पहले को सौतेले भाई की पुत्री के पुत्र के मुकाबले प्राथमिकता नहीं मिलेगी
क्योंकि संबंधों की प्रकृति दोनों मामलों में समान नहीं है दूसरा, उत्तराधिकारी यद्यपि
सौतेला है किंतु धारा 104 के नियम 4 के आधार पर करीबी उत्तराधिकारी है।
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112. दो से ज्यादा उत्तराधिकारी होने पर उत्तराधिकार का तरीकाः यदि किसी निर्वसीयती की संपत्ति में दो या दो से ज्यादा संयुक्त उत्तराधिकारी हैं तो संपत्ति इस प्रकार दी जाएगी,
(क) वैसे ही, जब तक इस भाग में स्पष्ट रूप से बतलाए गए
प्रावधान के के विरुद्ध न हो, प्रति व्यक्ति न कि प्रति शाखा_ और
(ख) संयुक्त अभिवृत्ति की बजाए साझा अभिवृत्ति के अनुसार।
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भाग 2, धारा 24, पृष्ठ 11
113. गर्भस्थ शिशु का अधिकारः निर्वसीयती की मृत्यु के समय गर्भ में पल रहा व्यक्ति जो बाद में जीवित उत्पन्न होता है, निर्वसीयती की संपत्ति में वही दाय