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अध्याय 8 भरण-पोषण
125. भरण पोषण से अभिप्रायः इस भाग में ‘‘भरण-पोषणय् में शामिल हैं-
(1) सभी मामलों में भोजन, कपड़ा, आवास, शिक्षा व बीमारी में देखभाल व इलाज_ तथा
(2) अविवाहित कन्या के संबंध में उसके विवाह व अन्य आकस्मिक व विवेकपूर्ण खर्चे।
भाग 3ए, धारा 3, पृष्ठ 2
पारिवारिक सदस्यों के भरण-पोषण की व्यक्तिगत जिम्मेदारी
126. पत्नी का भरण पोषण ः
(1) इस भाग के प्रावधानों के अधीन, एक हिंदू पत्नी, चाहे
वह इस कानून के लागू होने से पूर्व हो या बाद में, अपने पति के जीवनकाल में पति व उसके बाद उसके पिता द्वारा भरण-पोषण की अधिकारी है।
(2) एक हिंदू पत्नी तभी तक अपने पति से भरण-पोषण की मांग कर सकती है जब तक वह उसके साथ रहती हैः
भाग 4, धारा 26, पृष्ठ 19 और 20
परंतु पत्नी बिना अपने भरण-पोषण पाने के अधिकार को खोए बिना अलग रहने की अधिकारिणी है यदि -
(क) यदि वह किसी खतरनाक प्रकार के कोढ़ से ग्रस्त हो अथवा रतिज संबंधी
छूत की बीमारी से ग्रस्त हो और उससे संपर्क स्थापित न कर सकता हो_
(ख) अगर वह उसी घर में, जिसमें उसकी पत्नी रह रही है, किसी रखैल को
रखता हो_
(ग) अगर वह किसी ऐसी क्रूरता के लिए अपराधी हो, जिससे उसके लिए उसके
साथ रहना असुरक्षित हो_
(घ) अगर वह परित्याग का अपराधी हो अर्थात् वह बिना किसी कारण व बिना
उसकी सहमति अथवा उसकी इच्छा के विरुद्ध उसे छोड़ कर चला गया हो_
(घ) किसी अन्य धर्मग्रहण करने के कारण उसके हिंदू होने को खारिज कर दिया
गया हो_