अध्याय 3- वसीयती उत्तराधिकार - Page 786

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अध्याय 8 भरण-पोषण

125. भरण पोषण से अभिप्रायः इस भाग में ‘‘भरण-पोषणय् में शामिल हैं-

(1) सभी मामलों में भोजन, कपड़ा, आवास, शिक्षा व बीमारी में देखभाल व इलाज_ तथा

(2) अविवाहित कन्या के संबंध में उसके विवाह व अन्य आकस्मिक व विवेकपूर्ण खर्चे।

भाग 3ए, धारा 3, पृष्ठ 2

पारिवारिक सदस्यों के भरण-पोषण की व्यक्तिगत जिम्मेदारी

126. पत्नी का भरण पोषण ः

(1) इस भाग के प्रावधानों के अधीन, एक हिंदू पत्नी, चाहे

वह इस कानून के लागू होने से पूर्व हो या बाद में, अपने पति के जीवनकाल में पति व उसके बाद उसके पिता द्वारा भरण-पोषण की अधिकारी है।

(2) एक हिंदू पत्नी तभी तक अपने पति से भरण-पोषण की मांग कर सकती है जब तक वह उसके साथ रहती हैः

भाग 4, धारा 26, पृष्ठ 19 और 20

परंतु पत्नी बिना अपने भरण-पोषण पाने के अधिकार को खोए बिना अलग रहने की अधिकारिणी है यदि -

(क) यदि वह किसी खतरनाक प्रकार के कोढ़ से ग्रस्त हो अथवा रतिज संबंधी

छूत की बीमारी से ग्रस्त हो और उससे संपर्क स्थापित न कर सकता हो_

(ख) अगर वह उसी घर में, जिसमें उसकी पत्नी रह रही है, किसी रखैल को

रखता हो_

(ग) अगर वह किसी ऐसी क्रूरता के लिए अपराधी हो, जिससे उसके लिए उसके

साथ रहना असुरक्षित हो_

(घ) अगर वह परित्याग का अपराधी हो अर्थात् वह बिना किसी कारण व बिना

उसकी सहमति अथवा उसकी इच्छा के विरुद्ध उसे छोड़ कर चला गया हो_

(घ) किसी अन्य धर्मग्रहण करने के कारण उसके हिंदू होने को खारिज कर दिया

गया हो_