हिंदू विवाह वैधता विधेयक - Page 80

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हमारे सामने जो विधिकरण है, अब उसकी ओर आते हैं। स्मृतियां सुविख्यात हैं, फिर भी वे परस्पर विरोधी हैं। एक ही स्मृतिकार स्मृति के विभिन्न पाठों में अन्तर कर देता है। यह बात सुविख्यात है कि एक ही कवि अपनी कविता में एक समान नहीं रहता। शेक्सपियर ने एक नाटक में महिलाओं के बारे में लिखा हैµ‘चंचलता का नाम ही नारी है।’ पर वे ही दूसरे नाटक में लिखते हैंµ‘वह इतनी सशक्त थी कि अपनी जंघा में स्वयं घाव भर लेती थी।’ मेरा अभिप्राय ब्रूटस की पोरशिया से है। अब हम अपने देश की ओर आते हैं। महान कवि और दार्शनिक तुलसीदास ने कहा हैµ‘ढोर गंवार शूद्र अरु नारी। यह सब ताड़न के अधिकारी।’ मेरे उन मित्रों के लाभ के लिए जो हिंदी नहीं जानते हैं, इसका अर्थ है कि गंवार, निःखर व्यक्ति, पशु, शूद्र और नारी ये प्रताड़ना योग्य हैं।

श्री राज बहादुर (मत्स्य के संयुक्त प्रांत)ः मैं सदन को सूचित करना चाहूँगा कि श्री कामथ द्वारा प्रस्तुत इस बहुश्रुत पद की व्याख्या नितांत अशुद्ध है।

श्री एच.वी. कामथः मुझे आशा है कि मेरे मित्र अपनी व्याख्या उस समय प्रस्तुत करेंगे, जब उन्हें बोलना है।

श्री राज बहादुरः उसका अर्थ यह है कि शूद्र जो ढोल के समान है, नासमझ है और नारी (अर्थात् महिला) जो पशु (जंगली जानवर) के समान है, वे चेतावनी के अधिकारी हैं। इसका अभिप्राय है कि ढोल (खोखला) शूद्र पशु (जंगली जानवर) के समान औरत हैं, जो पीटने के योग्य हैं।

श्री एच.वी. कामथः किंतु हमारे विधि-विधान में मनु का कथन हैः यत्र नार्यस्तु जन्ते रमन्ते तत्र देवतः। इसका अभिप्राय यह है कि जहां महिलाओं का आदर किया जाता है वहीं देवता प्रसन्न होते हैं।

अलग-अलग स्मृतियों और शास्त्रों को एक ओर छोड़ते हुए क्या कहता हैµहिंदुओं का सबसे महान ग्रंथ ‘गीता’ है। उस समय जब श्री कृष्ण गीता के माध्यम से अर्जुन को उपदेश दे रहे थे, तब हिंदुओं में अनेक रिवाज़ थे, जो समाज के कुछ वर्गों के लिए अपमानजनक थे। तब श्री कृष्ण ने मनुष्य रूप से अर्जुन को स्पष्ट बताया था कि किसी मनुष्य का सबसे बड़ा लक्ष्य क्या है?

माननीय अध्यक्षः माननीय सदस्य अपना भाषण सोमवार को जारी रख सकते हैं। (इसके बाद विधानसभा सोमवार 28 फरवरी, 1949 को पौने ग्यारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।)