(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 82

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हिंदू संहिताµजारी

माननीय अध्यक्षः अब यह सदन हिंदू संहिता पर फिर से विचार करने के लिए अग्रसर होगी।

ऽश्री एच.वी. कामथ (सीपी और बरारः सामान्य)ः अध्यक्ष महोदय, जब शुक्रवार को यह सदन स्थगित किया गया था, तो उस समय मैंने मन में श्री कृष्ण का नाम था। मैं कह रहा था कि मानव अस्तित्व के सबसे उच्च आदर्श का जहां तक संबंध है, यह है कि ‘गीता’ में श्री कृष्ण ने पुरुष और स्त्री को समानता का निरपेक्ष आधार दिया है। ‘गीता’ हिंदुओं के लिए पवित्र स्मृति है अर्थात् सर्वोच्च शास्त्र है, सभी दर्शन और सभी धर्मों का सारतत्व है। उसमें एक बहुश्रुत श्लोक है, जिसमें श्री कृष्ण कहते हैंµ फ्स्त्रियों वैश्यास्तथा शूद्रास्तेपि याति परमगतिमय् यानी महिलाएं, वेश्याएं और शूद्र, जो उस युग में प्रत्यक्ष रूप से दलित और दलित वर्गों या जातियों के थे, वे भी श्री कृष्ण कहते हैं कि वे ब्राह्मण और अन्य जातियों से समानता के आधार पर बराबर हैं।

श्री एल. कृष्णास्वामी भारती (मद्रासः सामान्य)ः श्री कामथ आप ठीक कहते हैं।

श्री एच.वी. कामथः जहां तक मोक्ष और पर गति का संबंध है, महिलाओं द्वारा उसे प्राप्ति करने में नितांत रूप से कोई बाधा नहीं है। मुझे यह कहते हुए दुख है कि आजकल कुछ ऐसे पुरुष और कुछ विशेष स्वामी, जिन्हें कथित रूप से धार्मिक अथवा आध्यात्मिक प्रमुख माना जाता है, इस बात में विश्वास करते हैं कि पुरुष और महिलाओं को समान स्तर पर नहीं रखना चाहिए। मैं सहमत हूँ कि वे सभी हर तरह एक जैसे नहीं हैंख्...,

मौलाना हसरत मोहानी (यू.पी.ः सामान्य)ः वे एक समान कैसे हो सकते हैं?

श्री एच.वी. कामथः परन्तु यह कहना कि वे असमान हें और बेतुके कारणों द्वारा इस दलील को समर्थन देना, मेरे लिए स्तब्धकारी है। दूसरा दिन मेरे लिए सौभाग्य-दुर्भाग्य का दिन था कि मैंने एक स्वामी को सुना जो बता रहे थे कि पुरुष और महिला असमान हैं और उस वक्तव्य के पीछे क्या कारण थे? उन्होंने एक अजीब बात कही और यह सदन इस बात से सहमत होगा। उन्होंने कहा कि पुरुष के मूंछें उगती हैं लेकिन महिला की मूंछे नहीं होतीं। मैं उपहास नहीं कर रहा हूँ, श्रीमान, हमारे कई मित्र उस बैठक में सम्मिलित थे, जिसे स्वामी ने संबोधित किया था और उन्होंने यह बात अपनी पूरी निष्ठा से कही थी। उन्होंने यह बात पूर्ण गंभीरता से कही थी कि आदमी के मूंछें उगती हैं तथा महिला मूंछें नहीं उगा सकती, तथा एक वर्ष में अधिक से अधिक तीन, चार या पांच बच्चे पैदा कर सकती हैं।

ऽसीए. (विधा.) डी., खंड 2, भाग II, 28 फरवरी, 1949, पृष्ठ 941-50