68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
एक माननीय सदस्यः एक वर्ष में?
श्री एच.वी. कामथः यह इस बात पर निर्भर है कि वह एक बार में तीन, चार या पांच बच्चे पैदा करती है। श्रीमान, वह यह भी कहते गए कि पुरुष एक सौ या अधिक बच्चों के पिता होने की क्षमता रखता है। श्रीमान, मेरी समझ से यह ऊटपटांग दलील है।
जब हम पुरुष और स्त्री की समानता की बात करते हैं, हम जानते हैं कि इसका आध्यात्मिक आधार है, जिसे श्रीकृष्ण के द्वारा गीता में कहा है। उनका कथन हैµ
सर्वभूतस्थमात्मानं सर्वभूतनि चात्मनि।
यही आधार है, यही मापदण्ड है, यदि मानव की समानता अथवा पुरुष और स्त्री की समानता के मापों की छड़ी है।
यो माम् पश्चति सर्वत्र, सर्वम्ं, च मयि पश्यति।
यह परीक्षण है, यही कसौटी है, यही मानव की समानता के मापने की छड़ी है, चाहे वह उच्च या निम्न हो, धनी या निर्धन हो, पुरुष या स्त्री हो।
मैं स्वामी द्वारा प्रतिपादित असमानता के विचार की पुष्टि नहीं करता। दूसरी ओर, मैं यह भी विश्वास नहीं करता कि स्त्री, जैसा कि हम में कुछ विश्वास करते हैं, धूम्रपान और मदिरा का सेवन करके पुरुषों की बराबरी कर सकती हैं। फिर भी कुछ ऐसा है जिसका विरोध किया जाना है, यदि उनके द्वारा पुरुष की समानता खोजी जाती है और न ही मैं महिलाओं के पश्चिम विचारधारा की प्रगतिशीलता से सहमत हूँ जो शायद पश्चिमी संस्कृति की शुरूआत है और प्रगतिशील होने का प्रयास, बॉल रूम डाकि्ंसग और अन्य पश्चिमी आदतों को लेने पर है। श्रीमान, यह भी मेरे विचार से पुरुष की समानता प्राप्त करने का कोई उपाय नहीं है।
श्रीमती पूर्णिया बनर्जी (यू.पी.ः सामान्य)ः यह हिंदू संहिता में सम्मिलित नहीं की गई है। किंतु क्या वह किसी साथी के बिना नृत्य करती है?
श्री एच.वी. कामथः मैं यह जानता हूँ, परन्तु हम यहाँ पुरुष और महिला की समानता की बात कर रहे हैं। हमारे महान विद्वान और दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनन् जो हिंदू धर्म और हिंदू जीवन शैली के विशेषज्ञ हैं, ने कहा हैःµ
फ्आधुनिक महिला, यदि मैं ऐसा कहूँ, अपना आत्मसम्मान खो रही हैं। वह अपने व्यक्तित्व और विरल स्वभाव का आदर नहीं करती अपितु वह पुरुष के समीप आने के प्रयत्न में अचेतन योगदान देती है। वह तीव्र गति से पुरुष और उसका यंत्र बनती जा रही है।य्
श्री आ.के. सिधवा (सी.पी. एवं बरारः सामान्य)ः आधुनिक पुरुष के बारे में क्या कहा जाएगा?