(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 84

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श्री एच.वी. कामथः मुझे आशा है कि हमारी महिलाएं इस बात को हृदयंगम् कर लेंगी और वे पुरुष की समानता के लिए ऐसे उपायों को नहीं अपनाएंगी।

श्रीमती एनी मेसकेरीन (ट्रावनकोर रियासत)ः मैं यह प्रश्न पूछ सकती हूँ कि क्या आधुनिक पुरुष किसी भी प्रकार से उनसे बेहतर है?

श्री एच.वी. कामथः यह महिलाओं के लिए उत्तर देने का है।

महाशय, जब मैं पुरुष और महिला के समानता की बात करता हूँ, तो मेरे सामने सीता, सावित्री, दमयंती, गार्गी, मैत्रेयी और उभय भारती जैसे ऐतिहासिक उदाहरण हैं। क्या आप अनुमति देंगे कि इन महिलाओं के बारे में अपने प्राचीन इतिहास से उल्लेख करने का कि इन महिलाओं ने हमारे प्राचीन वैदिक काल में कैसा उत्तम स्थान बना लिया था और अब बाद में भी, इस हिंदू संहिता के हमारे विरोधी उन पर निर्भर हैं। यह कहा जाता है कि वैदिक और उपनिषद-काल में महिलाओं ने समाज में काफी ऊंचा स्थान प्राप्त कर लिया था। उपनिषद काल की विरली महिलाओं में मैत्रेयी का नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उनकी आध्यात्मिक प्रबुद्धता का प्रकाश आज भी विश्व में व्याप्त है। केवल बौद्धिक कुशाग्रता के कारण दो महिलाएं विरल बुद्धिमता में आगे रही हैं। उसके काल में एक अखिल भारतीय धार्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इस देश की परम्परा रही है कि इन सम्मेलनों में सब तरह की चीजें होती हैं और धार्मिक सम्मेलन भी अपवाद नहीं थे- तदनुसार एक अखिल भारतीय धार्मिक सम्मेलन का आयोजन प्रागैतिहासिक काल में तथा दूसरे अखिल भारतीय धार्मिक सम्मेलन का आयोजन बौद्धकाल के उपरान्त भी किया गया। इन सम्मेलनों का आयोजन बौद्धिक या अकादमिक बहस के लिए नहीं किया गया था, अपितु ऐसे सिद्धांतों की स्थापना के लिए किया गया, जो देश के आध्यात्मिक जीवन को शासित करें। पहला सम्मेलन मुनि याज्ञवल्य द्वारा आयोजित किया गया था, जो हमारे विधिवेता थे तथा दूसरा सम्मेलन गुरु श्ांकराचार्य द्वारा आयोजित किया गया था। पहला सम्मेलन याज्ञवल्य का सम्मेलन का संचालन राजा जनक ने किया था। महान जनक, कर्मयोगी, उसमें जब भारत के सभी क्षेत्रों से ऋषि-मुनि एकत्र हुए थे। कश्मीर से कन्याकुमारी तक और मेरा अनुमान है कि खैबर से चेरापुंजी तक चुप हो गए थे, जब गार्गी उठी थी। महिलाओं की तरफ से दबे-कुचलों की बात रखने। श्रीमान, यह वह आदर्श है जिसके लिए हमारी महिलाओं को प्रगतिशील बनना है और मुझे आशा है कि वे ऐसा करेंगी। गार्गी लम्बे वाद-विवाद में कड़ी टक्कर देने के बाद परास्त हो गईं।

दूसरे सम्मेलन में, अर्थात् शंकराचार्य सम्मेलन में सभापतित्व के गौरवपूर्ण कार्यभार का दायित्व मण्डल मिश्र की पत्नी उभय भारती ने निभाया। अब यह अधिक महत्वपूर्ण हैµऔर मैं चाहूँगा कि मेरी महिला मित्र इस पर ध्यान दें कि विश्व के इतिहास में ऐसी महिला का एक भी उदाहरण नहीं है, महिला को इतने महत्वपूर्ण सम्मेलन के