(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 88

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ने कहा कि हिंदू खतरे में हैं, सामाजिक व्यवस्था खतरे में है और समाज में वि शृंखलता बढ़ रही है? तब क्या हम अत्यावश्यक सुधारों के साथ नहीं थे? हमने समतावादी आधार पर हिंदू समाज के उद्धार को प्रोत्साहन देने में सहायता नहीं की? इन प्रयासों की पराकष्ठा के रूप में ही नहीं हमने संविधान के मसौदे के एक अनुच्छेद में अस्पृश्यता के निवारण का उल्लेख किया है और उसे किसी दशा या रूप में अवैध घोषित किया है। यदि हम ऐसा कुछ कर सके, हिंदू धर्म के बारे में दकियानूसी पंडितों द्वारा जो कुछ कहा जाता है, के बावजूद तो हमें ऐसा कोई भी कारण दिखाई नहीं देता कि हम सामाजिक संबंधों और व्यैक्तिक कानून की व्यवस्था न करें अथवा इस बारे में कानून न बनाएँ।

श्रीमान, माननीय सदस्य उस विरोध को याद करना चाहेंगे, जो शारदा ऐक्ट के विरुद्ध प्रारंभ किया गया था। जो बाल विवाह को निषिद्ध करता था इस आधार पर कि हिंदू धर्म तथा हिंदू समाज खतरे में बताए गए थे। गत शताब्दी में जब सती प्रथा, विधवा का पति के शवदाह के साथ जलाने को उन्मूलन करने के लिए कहा गया था, इन्हीं प्रतिक्रियावादियों ने जिन्होंने प्रगति का मार्ग अवरुद्ध कर दिया था यह कहकर कि हिंदू-धर्म ने सती प्रथा की स्वीकृति दी है तथा सती होने से महिलाओं को परम् मुक्ति मिल जाती है, इसलिए यह प्रथा जारी रखनी चाहिए। उनके विद्रोह तथा अवरोध के बावजूद, अति आवश्यक सुधार स्वीकार किए गए।

पंडित ठाकुर दास भार्गव ने उस दिन कहा था कि यह विधेयक ग्रामीण जनता के समीप नहीं पहुंचा था और अनपढ़ों या ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने इस विधेयक को पढ़ा नहीं है और इस पर विचार नहीं किया है। उन्होंने उस विधेयक के बारे में सदन में विचार करने से पूर्व, उनकी प्रतिक्रियाओं को जानने की चिन्ता व्यक्त की है। जब उन्होंने यह कहा था, तब वह यह तथ्य भूल गए कि उन्होंने जो विधेयक प्रस्तुत किए थे वे विधेयक उनके अपने हिसार के किसानों ने नहीं देखे थे। मुझे आश्चर्य है यदि यही उनका परामर्श है, तो हमें देश के प्रत्येक गांव, पुरवा-पल्ली तथा वासभूमि में इस विधेयक की प्रतियां परिचालित करनी होंगी।

श्री महावीर त्यागी (यू.पी.ः सामान्य)ः इन दिनों किसान नहीं गिने जाते।

श्री एच.वी. कामथः मैं श्री त्यागी से यह सुनकर आश्चर्यचकित हूँ कि किसानों को इन दिनों गिना नहीं जाता। यदि वे नहीं गिने जाते, तो कौन गिना जाता है?

माननीय सदस्यगणः आप।

श्री एच.वी. कामथः मैं वस्तुतः इस प्रशंसा के लिए आभारी हूँ। श्रीमान, मैं आशा करता हूँ कि निकट भविष्य में न केवल मैं, अपितु इस सदन से मेरे सभी मित्र मेरे समान ही गिने जाएंगे। श्रीमान, पंडित ठाकुर दास भार्गव ने जो विशेष टिप्पणियां की हैं, उनके प्रति मेरी सहानुभूति है। पर मैं यह नहीं सोचता कि हिंदू संहिता विधेयक का इस आधार