(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 89

74 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पर विरोध करना, किसी भी जांच के लायक है कि इस विधेयक का परिचालन अथवा प्रकाशन, प्रभावित व्यक्तियों के लिए नहीं किया गया है। यह दलील नितांत अमान्य है। इस तरीके से तो प्रत्येक विधेयक को जिसे यहां पारित किया जाना है और जो लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करता है। उन लोगों के पास भेजना होगा, ताकि वे अपनी स्वीकृति अथवा अस्वीकृति दे सकें।

श्रीमान, मुझे आशा है कि अब संतोषजनक रूप से मैंने इस विक्षुब्ध करने वाले समानता के प्रश्न का समाधान कर दिया है। श्रीमान, पुरुष और महिलाएं आध्यात्मिक स्तर पर समान ही होती हैं। गीता, स्मृतियों और स्वयं श्री कृष्ण ने भी समानता का सिद्धान्त बताया है।

श्रीमान, सम्पत्ति के प्रश्न पर विचार करते समय यह कहना उपयुक्त है कि अधिकांश दार्शनिकों, राजनेताओं, सामाजिक कार्यकताओं तथा अन्य व्यक्तियों के अनुसार विश्व में सम्पत्ति सभी बुराइयों की जड़ है। इस संबंध में मैं सेठ गोविन्द दास द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ। वे इस समय सदन में नही हैं कि सर्वोत्तम उपाय यह होगा कि निजी सम्पत्ति का उन्मूलन कर दिया जाए। यहां तक कि मुकदमेबाजी भी काफी कम हो जाएगी, यदि ऐसा किया जाता है। हमारे सबसे महान कानून निर्माताओं में से एक कानून-निर्माता और प्राचीन काल में कुशल राजनीतिज्ञ, मनु अथवा याज्ञवल्कय नहीं, अपितु योद्धा राजनीतिज्ञ भीष्म पितामह ने महाभारत के दो पर्वों अर्थात् शान्ति पर्व और अनुशासनिक पर्व में अपने सिद्धांत का प्रतिपादन किया है। वहां वे युधिष्ठर को सम्पत्ति के बारे में बतलाते हैंः

फ्नित्यो नित्योडिग्मोहि कनवन् मृत्योरस्य गतो यथोय्

वे युधिष्ठर को बताते हैं कि उन्होंने अपने साम्राज्य और स्वैच्छिक गरीबी को तराजू पर तोला है। उनका कहना है कि अकिंचन की स्वैच्छिक गरीबी, सम्राज्य से कहीं अधिक भारी सिद्ध हुई है। उन्होंने कहा था, जिसे अंग्रेजी में इसके करीब होगाµ‘मुकुट धारण करने वाले का दिमांग अशांत रहता है।’ व्यक्ति के पास सम्पत्ति है, तो वह मृत्यु से भयभीत रहता है।

मैं पंडित ठाकुर दास भार्गव के इस विचार से सहमत हूँ जब उन्होंने कहा कि पत्नी और पति को न केवल प्रेम में एक होना चाहिए अपितु संपत्ति में भी एक होना चाहिए। कभी-कभी ऐसा होता है कि प्रेम ही उनकी सम्पत्ति होती है। यानि पति और पत्नी के पास कोई भी निजी सम्पत्ति नहीं होती, तब भी उनके पास केवल पारस्परिक प्रेम ही सम्पत्ति है। परन्तु श्रीमान, हमें आज के जीवन के यथार्थ का भी सामना करना चाहिए। फिर भी पंडित भार्गव के इस संबंध में व्यक्तिगत अनुभव जानकर अच्छा लगा। यह विश्व रहने के लिए आनन्ददायक है, यदि पंडित ठाकुर दास भार्गव और उनकी पत्नी के समान ही अन्य पुरुष और महिलाएं तथा पति और पत्नियां समान रूप से आनन्द में रहें। फिर भी आज सैंकड़ों ऐसे मामले हैं जिनमें पत्नी और पति के बीच सम्बंध वैसे