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सुखद नहीं रह पाते जैसे कि होने चाहिए अथवा जैसा हम चाहते हैं। (हस्तक्षेप) श्रीमान, मैं ऐसे तथ्यों के आधार पर कह रहा हूँ जो मेरे माननीय मित्र श्री वी.दास ने बताए हैं और इस दिशा में अन्य मित्रों ने भी मेरा ज्ञानवर्धन किया है।
हमारा हिंदू संहिता विधेयक इस दिशा में यह व्यवस्था देता है कि किसी महिला को अपनी सम्पत्ति में पूर्ण स्वामीत्व का अधिकारी होना चाहिए। वैदिक काल और प्राचीन काल में भी जिनको हमारे धर्म और हिंदू संहिता विधेयक के विरोधी अपना आधार बनाए हुए हैं। स्थिति ऐसी ही थी। फिर मध्यकाल में ही ऐसा हुआ कि हिंदुइज्म का ”ास हो गया था और तभी महिलाओं के सम्पत्ति के अधिकार भी प्रतिबंधित हो गए। इस तरह वैदिक काल में महिलाओं की सामाजिक स्थिति सामान्यतः उच्चस्तरीय थी।
माननीय अध्यक्षः ऐसे और भी व्यक्ति हैं जो बोलना चाहते हैं। मैं माननीय सदस्य से अपील करता हूँ कि वे यथासंभव अपने भाषण को छोटा कर दें।
श्री एच.वी. कामथः मैं संक्षेप में होने का प्रयत्न करूँगा, परन्तु मुझे भय है, यह विषय इतना बड़ा है कि संक्षिप्त भाषण करना कठिन काम है।
माननीय बी.आर. अम्बेडकर (विधि मंत्री)ः श्री कामथ के लिए अनेक अवसर आएंगे जब अपना भाषण दे सकेंगे। कम से कम 130 धाराएं हैं।
श्री एच.वी. कामथः परन्तु मैं नहीं चाहता कि आज कुछ बातें अनकही रह जाएं। मैं बता रहा था कि वैदिक काम में महिलाओं की सामाजिक स्थिति उच्च थी। अविवाहित पुत्री को अपने पिता की सम्पत्ति में भाग दिया जाता था तथा विवाहित पुत्री को कोई हिस्सा नहीं मिलता था, परन्तु उसे विवाह के समय बहुत दहेज दिया जाता था। इसलिए मेरे माननीय मित्र पंडित ठाकुर दास भार्गव के द्वारा प्रस्तुत दलील में मेरे विचार से इस पर सदन तथा माननीय विधि मंत्री द्वारा सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाना चाहिए, क्योंकि मेरे द्वारा आधारभूत रूप से सम्पत्ति का विरोध किये जाने पर मैं नहीं सोचता कि सम्पत्ति की स्थिति अपेक्षाकृत अधिक खराब बनाने से कुछ लाभ हो सकेगा जैसा कि आज है। डॉ. अम्बेडकर ने उस हिंदू परिवार की सम्पत्ति के बारे में उल्लेख किया है, जिसमें 12 बेटे और एक बेटी है। यह उनके लिए बहुत ठीक है कि उन्होंने यह उदाहरण दिया है, परन्तु क्या मैं एक अन्य उदाहरण प्रस्तुत करूं जिसमें 12 बेटियां और एक बेटा है। क्या स्थिति होगी, जब जो आज की स्थिति में है हिंदू संहिता विधेयक इस मामले में लागू किया जाए? परिवार की सम्पत्ति को सभी बेटियों और एक बेटे में विभाजित करना होगा। बेटे को घर के एक छोटे-से कोने तक सीमित रह जाएगा और बेटियों के विवाह हो जाते हैं तो उन्हें अधिकार होगा कि वे अपने पतियों को ले आएँ और तब उन्हें अधिकार होगा कि वे घर के एक भाग को किसी अजनबी व्यक्ति के हाथ बेच दें। इस प्रकार अकेला बेटा छोटे-से चूहे के समान इधर-उधर रेंगता रहेगा और उसके