78 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
श्री एच.वी. कामथः नियम के अपवाद सदैव होते हैं। मेरा अनुमान है कि मैं भी उनमें से एक हूँ।
यदि मुझे हाल ही के एक ऐतिहासिक उदाहरण को उद्धृत करने की अनुमति दी जाए कि जर्मनी में डेर फयूरेर हेर हिटलर, जब 1932 में चुनाव के लिए खड़े हुए थे, तो उनका एक नारा थाµफ्जर्मनी के प्रत्येक नागरिक को रोजगार दिया जाएगा तथा जर्मनी की प्रत्येक महिला को पति दिलाया जाएगा।य् मेरा विचार है कि इस नारे से उन्हें लाखों महिलाओं के मत प्राप्त हुए क्योंकि उन्होंने प्रत्येक जर्मनी की महिला के लिए पति दिलाने का वचन दिया था। यह उसी सिद्धांत को सिद्ध करता है जो मैंने आपके समक्ष प्रस्तुत कर दिया है कि विवाह सरलता से किया जाए, जबकि तलाक में कठिनाई हो। मेरे माननीय मित्र पंडित ठाकुर दास भार्गव ने उस दिन कहा था, जब वह इस विषय पर बोल रहे थे कि हमारे देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग प्रथाएं और रिवाज हैं, जिनके अनुसार ‘तलाक’ प्रभावी माने जाते हैं। मुझे बताया गया है कि एक सबसे सरल रिवाज है जिनके अनुसार पुरुष कहता है, ‘तलाक’ और वही शब्द तीन बार दोहराता है। इस तरह पत्नी को तलाक दे दिया जाता है। ऐसा ही रिवाज है अथवा कुछ अन्य प्रथाएं हैं। मैं नहीं जानता, इसलिए मैंने कहा, मुझसे कहा गया पर मैं व्यक्तिगत रूप से सोचता हूँ कि तलाक की प्रक्रिया को सरल नहीं होना चाहिए। एक आधुनिक देश, सोवियत रूस ने शताब्दी के प्रारंभिक बीस वर्षों में विवाह और तलाक दोनों को सरल बना दिया था। परन्तु उन्होंने अनुभव से यह सीखा कि परिवार सामाजिक इकाई के रूप में सशक्त और सुरक्षित रखा जाना चाहिए। साम्यवादी देश में अब वहां और इसलिए विवाह सरल है किन्तु तलाक लगभग असंभव है। इसलिए मेरा विचार है, यद्यपि मैं पंडित ठाकुर दास भार्गव के विचार से कितना ही सहमत क्यों न रहूँ परन्तु कुछ रिवाज़ और प्रथाओं को मान्यता दी जानी चाहिए तथा उन्हें जीवित रखना चाहिए। तलाक का संबंध है, मेरे विचार से उसमें जो प्रक्रिया अपनाई जाए, वह कठिन होनी चाहिए, ताकि परिवार सामाजिक इकाई के रूप में सशक्त और सुरक्षित रह सके।
एक और सुझाव है, जिसे मैं इस विषय में बताना चाहूँगा। श्रीमान, ऐसे भी उदाहरण हैं जहां कुछ कारणों से विवाह का विच्छेद वांछनीय नहीं माना जाता, अथवा पति-पत्नी में से किसी एक के द्वारा इस बारे में सहमति नहीं दी जाती। ऐसे मामलों में, जहां पत्नी इस बात से सहमत हो कि पति दूसरी स्त्री से विवाह कर सकता है, चाहे दूसरी पत्नी उसी घर में हो अथवा दूसरे घर में रहे। मैं नहीं देखता कि इसमें कोई कारण है, उनके होते हुए यहां कुछ कारण बताए गए हैं कि ऐसी स्थिति में पति और पत्नी में से किसी को भी विवाह-विच्छेद के बिना विवाह करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। जबकि दूसरे पक्ष की सहमति हो। दिल्ली में मैं एक लब्ध प्रतिष्ठ व्यक्ति को जानता हूँ जो एक साथ कई पत्नियों को रखता है और शायद अलग-अलग घरों में रखता है।