(प्रवर समिति की रिपोर्ट के प्रस्तुत करने के लिए समय-सीमा में वृद्धि) - Page 95

80 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

नाम पर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के नाम पर, कृपया इस विधेयक पर अपना मत न दें। मैं सोचता हूँ कि यही तर्क विधेयक के पक्ष में मत देने के लिए पर्याप्त है। मैं कह सकता हूँख्...,

श्री वी.एल. सोधी (पूर्वी पंजाबः सामान्य)ः वह मित्र पुरुष है अथवा महिला?

श्री एच.वी. कामथः मैं यह कहता हूँ, मैं कहने का साहस रखता हूँ कि ईश्वर के नाम पर जिसने पुरुष और महिला को समान बनाया है_ राष्ट्रपति महात्मा गांधी के नाम पर जो पुरुष और महिला की पूर्ण समानता के लिए लड़ते रहे_ नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के नाम पर जो पुरुष और महिला की पूर्ण मुक्ति के लिए कार्य करते रहे तथा आवश्यकता पड़ने पर महिलाओं को युद्ध में लड़ने के लिए भी बुलाया, उसी ईश्वर के नाम पर, गांधी के नाम पर, सुभाष के नाम पर मैं समझता हूँ कि यह विधिकरण आगे ले जाने वाला उपाय है। और यह हिंदू समाज के गौरव को बढ़ाएगा।

अब मुझे केवल एक टिप्पणी करनी है। मेरे माननीय मित्र डॉ. अम्बेडकर ने उस दिन अपने भाषण में कहा था कि या तो बार-बार मरम्मत करो अथवा नष्ट हो जाने दो। हमें मरम्मत करनी है। वास्तव में हम मरम्मत कर रहे हैं, इसलिए अब अच्छा समय समीप है। यदि हम मरम्मत नहीं करते, तो समाज दो भागों में विभाजित हो जाएगा। समय पर मरम्मत करने से सदैव बचत होगीः अन्यथा खर्च बढ़ता ही जाएगा और समाज दो टुकड़ों में बंट जाएगा।

श्रीमान, मैंने शुक्रवार को अपना भाषण शुरू किया था, वह दिन महाशिवरात्रि से पूर्व का दिन था, और मैं महाशिवरात्रि के दिन के बाद संक्षेप में अपने भाषण का समापन कर रहा हूँ। यह दिन इस युग की महान महिला महासती मां कस्तूरबा और महामानव, स्वामी दयानन्द सरस्वती की स्मृति में पवित्र दिन है। मुझे आशा है कि उनीक आत्माएं, मां कस्तूरबा और स्वामी दयानन्द सरस्वती की आत्माएं, हमें हमारे कार्य में प्रेरणा देंगी और हमारे कठिन कार्यों में हमारी सहायता करेंगी। यह मेरी आशा है और ईश्वर से प्रार्थना है कि पुरुष और महिला जीवन की तीर्थयात्रा में साथ-साथ यात्रा करें। खुद को समर्पित करते हुए अर्थ तथा काम की प्राप्ति में अपने जीवन को अर्पित कर दें। अर्थ और काम, धर्म में जड़ें जमाए हुए हैं तथा वे मोक्ष के लक्ष्य तक पहुंचाते हैं और बंधनों से मुक्ति दिलाते हैं एवं हम ईश्वर के सहारे जीवित हैं तथा गतिशील हैं और उसी के सहारे हमारा अस्तित्व है। अतः हम सभी पुरुष, सभी महिलाएं और सभी जीव समान, स्वतंत्र और ईश्वरीय शक्ति से ओत-प्रोत हैं।

हरिओउम् तत्सत्। ब्रहमार्पणमस्तु।

श्री नजीरुद्दीन अहमद (पश्चिम बंगालः मुस्लिम)ः क्या मैं यह कह सकता हूँ कि मैं अब पुरावशेषों के समान होता जा रहा हूँ। मैंने मूल प्रस्ताव के विरोध का कार्य