82 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
बाबू रामनारायण सिंहः जनमत संग्रह करा लिया जाए और आपको पता लग जाएगा।
श्री एल. कृष्णास्वामी भारतीः हम यहां उन्हीं के प्रतिनिधि हैं।
बाबू रामनारायण सिंहः प्रत्यक्ष रूप से ऐसा लगता है कि हिंदू संहिता विधेयक एक विधिकरण है और इस सदन में इस पर बहस की जा रही है। परन्तु तथ्य यह है कि एक साजिश की जा रही है कि हिन्दू समाज को तोड़ने की। मैं महसूस करता हूँ कि यह ऐसी तैयारी है जो हिंदू समाज पर आक्रमण करना चाहती है। यह कोई भी नहीं बता सकता कि यह हिंदू समाज कितने समय तक विपरीत स्थितियों में भी जीवित रहा और सम्पन्न हुआ। मैं यह कह सकता हूँ कि विश्व के सृजन के समय से, सूर्य और चंद्रमा के सृजन समय से, मानव जाति के सृजन समय से, हिंदू-समाज जीवित रहा है और समृद्ध हुआ है। इन सभी कालों में हिंदू-समाज के विरुद्ध सभी प्रकार के आक्रमण हुए हैं। सर्वप्रथम बुद्ध आये। एक समय ऐसा लगा कि हिंदू समाज नहीं रहेगा, परन्तु विश्व गुरु शंकराचार्य आए और उन्होंने इस देश से बौद्ध धर्म को निकाल बाहर किया तथा हिंदू-समाज की पुनः स्थापना की। इसके बाद इस्लाम धर्म आया। वह भी बौद्ध धर्म जैसा ही आक्रमण था वह सैन्य कार्रवाई भी थी। लेकिन मुझे यह कहना है कि वह धर्म भी इस देश में असफल रहाख्...,
डॉ. मॉन मोहन दास (पश्चिम बंगाल)ः इस्लाम रक्षक बन गया है और आपने इस्लाम के संरक्षण को स्वीकार कर लिया है।
बाबू रामनारायण सिंहः इस्लाम रक्षक नहीं बन सकता, बल्कि इस्लाम इस देश में असफल हो गया। इस्लाम के अनुसार, कुरान में कोई जातिगत प्रथा नहीं है, परन्तु वहां इस्लाम के अनुयायियों में भी किसी न किसी प्रकार की जाति-प्रथा पनप गई। इसी प्रकार जैनधर्म, सिख धर्म सभी धर्म आये और मूलतः ये सब हिंदुत्व के विरुद्ध आक्रमण थे परन्तु समय के साथ वे सहिष्णु हो गए और हिंदू समाज के साथ-साथ विकसित और समृद्ध होने लगे। इस बार यह एक प्रकार का आक्रमण ही है। यद्यपि यह आक्रमण जनतांत्रिक है, किंतु इसके पीछे जो शक्ति है, वह तानाशाही जैसी है।
मेरे कुछ मित्रों ने पहले ही कहा है कि इस विधिकरण को कानून बनाने के लिए इस सदन के अधिकारों के बारे में बहस हो चुकी है। यह सत्य है और मैं आश्वस्त हूँ कि यह सदन सक्षम नहीं है कि इस प्रकार का विधिकरण किया जाए। यह संवैधानिक सभा ही नहीं हैख्...,
एक माननीय सदस्यः फिर यह क्या है?
बाबू रामनारायण सिंहः यह संवैधानिक सभा का एक भाग है। इस सदन के कई सदस्यों से व्यवस्था अथवा परम्परा द्वारा यह कहा गया है कि वे इस विधानसभा में उपस्थित न होंख्...,