हिंदू कोड - जारी - Page 100

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क्योंकि इस स्थिति में महिलाएँ दोनों तरफ से नुकसान में रहेंगी, विवाह के समय पुत्र कहेगा कि ‘‘उसे इतना दहेज क्यों दें? उसे उत्तराधिकार मिलने जा रहा है।’’ उत्तराधिकार के समय पिता, पुत्रों के पास जायेगा तथा वे वसीयत लिखेंगे जिसमें पुत्री को उत्तराधिकार से वंचित रखा जायेगा। महिलाओं को दोनों ओर से कुछ नहीं मिलेगा। यह महिलाओं के साथ सही व्यवहार नहीं होगा।

जब आप पूछते हो यह विधेयक किन लोगों पर लागू होगा, मैं निश्चित रूप से कहूँगा कि यदि आप इस संहिता को अपनाते समय हमारी सदियों पुरानी भावनाओं और परम्पराओं का ध्यान नहीं रखोगे, यदि आप ऐसा टकराव पैदा करेंगे, तो हमें कहना पड़ेगा कि ‘‘आप हमें हमारे भाग्य पर छोड़ दीजिए’’, यही मेरा विनम्र निवेदन है। यद्यपि मैं इस विधेयक के अच्छे प्रावधानों के पक्ष में हूँ, मैं डॉ. अम्बेडकर तथा इसके पक्षधर सदस्यों से अनुरोध करूंगा कि वे यह देखें कि इस मामले में हमारी भावनाओं का आदर हो और हमें ऐसी प्रथाओं अथवा कानून के उन प्रावधानों का पालन करने की अनुमति दी जाये जिन्हें हमारे विशेष प्रांत में अधिकांश लोग चाहते हैं। यही हमने विधेयक के भाग एक के संबंध में संशोधन किया है।

श्री त्यागी : बहुसंख्यक लोगों की सहमति को कैसे प्राप्त किया जायेगा?

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पंडित ठाकुर दास भार्गव : पंजाब में बहुसंख्यक मन स्पष्ट है। आप किसी भी

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गांव या शहर में जाइये तथा विधेयक से प्रभावित किसी भी व्यक्ति से पूछिये, तो उसका जवाब यही होगा जो मैं कह रहा हूँ, वहाँ कोई मतभेद नहीं है। इसलिए मेरा निवेदन है कि जब भी आप पंजाब पर यह कानून लागू करेंगे : मैं चाहता हूँ कि यह कानून पंजाब पर लागू होना चाहिए : आप इसे इन आपत्तियों के साथ लागू करें। यह कानून खराब नहीं है। यह सुझाव देना एकदम गलत है कि इसमें स्वाभाविक रूप से कुछ गलत है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हम कई शताब्दियों से इन परम्पराओं के अनुसार चल रहे हैं तथा हमें हमारे राष्ट्र को हुई क्षति को सुधारना चाहिए। इसलिए, मैं इस विधेयक का पूर्ण समर्थन करता हूँ, परन्तु यदि उन मतां और परम्पराओं जो लोगों में व्यापक रूप से प्रचलित हैं तथा जो बहुत ही जटिल हैं, को परिवर्तित किया गया तो हिंदू समाज में अत्यधिक विवाद पैदा हो जायेगा और पंजाब में प्रत्येक परिवार प्रभावित होगा। मुकदमेबाजी के अलावा कुछ भी नहीं होगा। आप जनमत के विरुद्ध विभाजन अधिनियम का प्रावधान ला रहे हो। इसका क्या परिणाम होगा? प्रत्येक व्यक्ति की मृत्यु पर यह प्रश्न उठेगा कि ‘‘हम कैसे अपने पिता की सम्पत्ति का आकलन करते हैं?’’ तब सम्पत्ति का आकलन होगा और पुत्रों के पास पुत्री के हिस्से की सम्पत्ति के लिए पर्याप्त धन नहीं होगा तथा समस्या खड़ी होगी। मैं अपने चालीस वर्ष की वकालत के अनुभव से बोल रहा हूँ।