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मिले। मैं इसके विरोध में नहीं हूँ परन्तु जब आपने यह प्रस्ताव रखा है तो आपको यह जोखिम उठाना होगा कि यह लम्बी सूची, जिसमें वर्जित पीढि़यों का उल्लेख है। धीरे-धीरे छोटी होती जाएंगी और समय के साथ-साथ समाप्त हो जाएंगी, मैं मानता हूँ कि वर्तमान सूची उतनी लम्बी नहीं है जितनी कठोर हिंदू कानून के अंतर्गत हुआ करती थी। यह समय के साथ-साथ निश्चित तौर पर समाप्त हो जायेगी।
श्री त्यागी : यह और निकट आयेगा।
सरदार हुकम सिंह : निश्चित रूप से। आप दोनों चीजों को अलग नहीं रख सकते हो। यदि आप इसे मुस्लिम कानून से लेते हो तो आपको चचेरे भाई-बहन और अल्प निकट संबंधियों को वर्जित पीढि़यों से अलग रखना होगा। इसमें कोई शक नहीं है। आप इसके लिए तैयार रहें। आपको इसके निकट तक जाना होगा। आप इससे दूर नहीं रह सकते हैं।
अब आप मुझसे कह रहे हैं कि आप भी इसमें शामिल हो जाएं और इस धार्मिक विवाह को अपना लीजिए, तो इसका परिणाम यह होगा कि वहाँ वर्जित पीढि़याँ हो जायेंगी। यद्यपि मैं उपर्युक्त संबंधियों के साथ विवाह करने के लिए स्वतंत्र हूँ, इससे मुझ पर प्रतिबंध लग जायेगा। यह केवल भविष्य के लिए ही नहीं होगा बल्कि पहले के विवाह भी अवैध हो जायेंगे। आपने खंड-21 में प्रावधान किया है कि मैं अपने धार्मिक विवाह को सिविल विवाह के रूप में पंजीकृत कर सकता हूँ। परन्तु ऐसे कितने उदाहरण हैं। हमें इन शादियों को अवैध करने के लिए अदालतों अथवा पंजीयक के पास जाना पड़ेगा। आप मेरे जैसे वृद्ध पुरुष को अब पंजीयक के पास अपने विवाह का पंजीकरण कराने के लिए भेजना चाहते हैं।
डॉ. अम्बेडकर : क्या आप फिर विवाह करना चाहते हैं?
माननीय अध्यक्ष : शांति! शांति!
सरदार हुकम सिंह : यह संहिता शक पैदा करेगी क्योंकि जिस लड़की से मैं शादी करता, वह आपके अनुसार वर्जित पीढि़यों के अंतर्गत होती। ऐसी स्थिति में क्या होगा? मैं माननीय मंत्री जी से पूछता हूँ कि ऐसे विवाह का क्या होगा?
श्री त्यागी : और आपके बच्चों का भी।
सरदार हुकम सिंह : हाँ, निश्चित रूप से। वे तब तक ‘अवैध’ होंगे जब तक मैं अपने विवाह को इस आयु में सिविल विवाह के रूप में पंजीकृत नहीं कराऊंगा। माननीय गृह मंत्री यह चाहते हैं कि मेरे जैसे सभी वृद्धों को पंजीयक के पास जाना चाहिए और अपने विवाह को पंजीकृत कराना चाहिए।