हिंदू कोड - जारी - Page 107

92 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

श्री त्यागी : जैसा कि उन्होंने स्वयं किया है।

सरदार हुकम सिंह : एक दूसरा विवाह, जिसे ‘करेवा’ विवाह के नाम से जाना जाता है। मेरे क्षेत्र के किसानों में प्रचलित है। इस संबंध में इस संहिता में कोई उल्लेख नहीं है। इस विवाह का क्या होगा? या तो हम धार्मिक विवाह करेंगे अथवा सिविल विवाह : इसके अलावा कुछ नहीं। कुछ माननीय सदस्यों को अजीब-सा लगेगा कि करेवा विवाह कितने साधारण तरीके से सम्पन्न होता है। उसमें कोई समारोह नहीं होता। यह एकदम धर्म-निरपेक्ष रिवाज है। इसमें वर-वधू साथ-साथ बैठते हैं, उनके ऊपर चादर बिछायी जाती है। बाद में मिठाई बांटी जाती है और वे पति-पत्नी बन जाते हैं। मेरे विचार से माननीय गृह मंत्री मुझे ऐसा कोई प्रावधान नहीं बता सकते हैं। जिसके माध्यम से ऐसे विवाहों की मान्यता दी जायेगी। वह इस संहिता को और भी जटिल बना रहे हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : यदि यह दो पतियों अथवा पत्नियों वाली शादी हो, तो समस्या पैदा हो सकती है।

सरदार हुकम सिंह : मैं आपकी अनुमति से मेरे माननीय मित्र से जान सकता हूँ कि वह किस प्रकार की शादी होगी। क्या वह बिना समारोह वाला धार्मिक विवाह होगा (व्यवधान) मैं उनसे सहमत नहीं हूँ तथा वह धार्मिक विवाह नहीं होगा। फिर भी, मैं किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहता हूँ।

अब मैं गोद लेने के प्रश्न पर आता हूँ। जो कुछ भी मैं कहने जा रहा हूँ उससे मेरे कुछ मित्र आश्चर्यचकित होंगे और इस संबंध में, मैं यह दावा कर सकता हूँ कि जहाँ तक गोद लेने का संबंध है, हम सारे देश से सबसे आगे हैं।

डॉ. अम्बेडकर : आप हमेशा सभी से आगे रहे हैं।

सरदार हुकम सिंह : मैं आपको अभी बताऊँगा तथा तब आप मेरी बात से सहमत होंगे कि हम उस विषय में भी काफी आगे हैं। जैसा कि मेरे माननीय मित्र, पंडित ठाकुर दास भार्गव ने कहा है, यह उत्तराधिकारी की परम्परागत नियुक्ति है। इसका धर्म से कोई संबंध नहीं है। हम पिंडों के लिए पुत्र पैदा करने के इच्छुक नहीं हैं।

श्री हुसैन इमान : वहां पिंड भी है?

माननीय अध्यक्ष : उन्हें अपनी बात कहने दीजिए।

सरदार हुकम सिंह : हम चाहते हैं कि हमें भी सम्पत्ति का हकदार मिल जाये।